नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई की महाराष्ट्र यात्रा के दौरान उच्च अधिकारियों ने सीजेआई के प्रोटोकॉल को तोड़ा था। जिससे सीजेआई गवई ने नाराजगी जताई थी। वहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई गई। जिसे सीजेआई ने खारिज कर दिया है। सीजेआई गवई ने सीजेआई के प्रोटोकॉल में उल्लंघन मामले में दाखिल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) खारिज कर दी और याचिकाकर्ता पर 7 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
CJI गवई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ये याचिका लगाई गई है। सिर्फ अखबारों में नाम छपवाने और चीप पब्लिसिटी के मकसद से ये PIL दाखिल की है, जिसका मतलब पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन है। बेवजह ही इसे मुद्दा बनाया जा रहा है।
ये रहा पूरा मामला
बता दें कि, CJI गवई 18 मई को महाराष्ट्र की यात्रा पर थे। जब वह मुंबई पहुंचे तो महाराष्ट्र के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और मुंबई पुलिस कमिश्नर जैसे वरिष्ठ अधिकारी उनकी अगवानी में वहां मौजूद नहीं थे। CJI के दौरे में प्रोटोकॉल तोड़ने पर जस्टिस बी आर गवई ने चिंता जताई थी। हालांकि, कुछ घंटे बाद दूसरे कार्यक्रम में तीनों अधिकारियों की मौजूदगी देखी गई।
PIL दाखिल करने वाले पर लगा 7000 रुपये का हर्जाना
इस मामले में PIL दाखिल करने वाले शख्स को सीजेआई ने फटकार लगाई है। और याचिकाकर्ता पर सात हजार का जुर्माना लगाया गया। इस दौरान, CJI बी आर गवई ने यचिकाकर्ता से पूछा कि उन्हें लीगल प्रैक्टिस करते हुए कितना समय हो गया है तो वकील ने बताया कि वह 7 साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं। CJI गवई ने इस पर याचिकाकर्ता से कहा कि सात साल हो गया है तो लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को उन्हें सात हजार रुपये का हर्जाना देना होगा।
‘बेवजह न बढ़ाएं मुद्दा’, बोले CJI गवई
जस्टिस बी आर गवई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि बिना मतलब इस मुद्दे को बड़ा विवाद न बनाया जाए। सीजेआई गवई ने कहा कि प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने पर नही, बल्कि लोकतंत्र के एक अंग के प्रमुख के तौर पर अपने पद की गरिमा को लेकर चिंतित थे। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते हैं कि इस मुद्दे को बेवजह बढ़ाया जाए।




