नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। चुनाव आयोग ने आज महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही देश के सर्वोच न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। यह याचिका देश में होने वाले चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपने अपने चुनावी घोषणापत्रों द्वारा जनता को लुभाने के लिए मुफ्त में दी जाने वाली घोषणाओं के खिलाफ डाली गई है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने 15 अक्टूबर 2024 को इस याचिका की सुनवाई की, उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका को पहले से लंबित पड़ी याचिकाओं के साथ जोड़ दिया।
मुफ्त वाली स्कीमों के ऐलान को रिश्वत घोषित कर देना चाहिए
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार SC में यह याचिका कर्नाटक के रहने वाले शशांक जे श्रीधर ने दायर की है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त वाली स्कीमों के ऐलान को रिश्वत घोषित कर देना चाहिए। याचिकाकर्ता शशांक जे श्रीधर ने कहा है कि यदि यह कहा जाए कि इन घोषणाओं के जरिए एक तरह से वोटरों को रिश्वत का झांसा देना है तो गलत नही होगा। याचिकाकर्ता शशांक जे श्रीधर ने अपनी याचिका के माध्यम से यह भी कहा है कि मुफ्त स्कीमों के माध्यम से सरकारी खजानों पर भी भारी बोझ पड़ता है। राजनीतिक दल अक्सर इस तरह की मुफ्त स्कीमों की घोषणा तो कर देते हैं, लेकिन यह कभी नहीं बताते हैं कि इसको पूरा कैसे करेंगे।
याचिकाकर्ता ने इन्हीं ऐलानों को लेकर SC में याचिका दायर की है
बता दें कि महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने जनता को लुभाने के लिए अपनी अपनी चुनावी वादों का ऐलान किया है। महाराष्ट्र सरकार ने हाल में ही मुंबई एंट्री पर लगने वाले टोल टैक्स को लेकर कारों के लिए टोल टैक्स माफ कर दिए हैं। इसके अलावा कई और बड़े ऐलान किए हैं, जिसमे लड़की बहिन योजना का ऐलान भी शामिल है। इसी तरह से हरियाणा और कश्मीर विधानसभा चुनाव से पहले भी सभी राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी चुनावी घोषणा पत्रों का ऐलान किया था। याचिकाकर्ता ने इन्ही ऐलानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दायर की है।





