नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारत में नागरिक पहचान का सबसे बड़ा दस्तावेज माने जाने वाले आधार कार्ड को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक आरटीआई के जवाब में खुलासा हुआ है कि पिछले 14 वर्षों में देश में 11.7 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन UIDAI ने सिर्फ 1.15 करोड़ आधार नंबर ही निष्क्रिय किए हैं। यह संख्या कुल मौतों के केवल 10% से भी कम है।
UIDAI के पास नहीं है सटीक डेटा
आरटीआई में जब पूछा गया कि कितने लोगों के आधार नंबर मृत्यु के बाद बंद किए गए, तो UIDAI ने केवल कुल आंकड़ा बताया 1.15 करोड़। और यह भी साफ कहा कि साल-दर-साल आधार निष्क्रियता का कोई रिकॉर्ड उनके पास नहीं है। इतना ही नहीं, जब आधार विहीन नागरिकों की संख्या का अनुमान मांगा गया तो UIDAI ने जवाब दिया कि “ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कैसे निष्क्रिय होता है किसी मृत व्यक्ति का आधार?
UIDAI के अनुसार, जब किसी मृत व्यक्ति का डेटा Registrar General of India (RGI) द्वारा साझा किया जाता है, तो उसे UIDAI के डेटाबेस से मिलाया जाता है। दो शर्तें देखी जाती हैं नाम की 90% तक समानता होनी चाहिए। लिंग का 100% मेल होना चाहिए। अगर ये शर्तें पूरी होती हैं, और यह साबित हो जाए कि आधार के ज़रिए मृत्यु के बाद कोई बायोमेट्रिक गतिविधि नहीं हुई है, तब ही आधार निष्क्रिय किया जाता है।
बिहार में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन
RTI रिपोर्ट में बिहार के कई जिलों की स्थिति भी सामने आई है जहां 100% से ज्यादा लोगों को आधार जारी किया गया है किशनगंज, 126%, कटिहार और अररिया,123% पूर्णिया, 121% शेखपुरा, 118% इसका सीधा मतलब है कि अनुमानित जनसंख्या से ज्यादा आधार जारी हो चुके हैं। इसके पीछे प्रमुख वजहें हैं मृतकों के आधार समय पर निष्क्रिय नहीं होना प्रवास (Migration) जनसंख्या अनुमान की गलतियां और आधार डुप्लिकेशन।
क्या कहता है यह खुलासा?
इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि आधार सिस्टम में गंभीर खामियां हैं। UIDAI के पास ना तो आधारविहीन नागरिकों का डेटा है, ना मृतकों के आंकड़ों का अद्यतन ट्रैक। ऐसे में नीति निर्माण, जनसंख्या गणना, और सरकारी योजनाओं की योजना में गड़बड़ियां होना तय है। जब आधार का इस्तेमाल बैंकिंग, राशन, वोटिंग और सब्सिडी तक में हो रहा है, तब इसका डेटा अप-टू-डेट और भरोसेमंद होना बेहद ज़रूरी है। इस आरटीआई ने UIDAI के कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब वक्त है कि UIDAI अपनी प्रणाली को सुधारे, डेटा अपडेट करे और मृतकों के आधार को समय पर निष्क्रिय करे, ताकि फर्जीवाड़ा, डुप्लिकेशन और गड़बड़ियों पर रोक लग सके।




