नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज कुमार झा ने गुरुवार को राज्यसभा में न्यूनतम वेतन में संशोधन की मांग की। राज्यसभा सांसद मनोज झा ने न्यूनतम वेतन में संशोधन को लेकर राज्यसभा में शून्यकाल नोटिस देकर चर्चा करने की मांग की। उन्होंने नोटिस में कहा कि 2018 में सतपति कमेटी की रिपोर्ट में यह तय हुआ था कि 375 रुपए प्रतिदिन या 9,750 प्रतिमाह के अलावा हाउस रेंट भी देने की बात हुई, लेकिन इसे बहाल नहीं किया गया, बल्कि एक एक्सपर्ट कमेटी बैठा दी गई, जिसकी रिपोर्ट पता नहीं कब तक आए। उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में एक गरीब व्यक्ति कैसे अपनी जीवन व्यवस्थित कर सकता है। हम सभी को एक ²ष्टिकोण से सोचना चाहिए। अगर गरीब जनता हमारी विमर्श के केंद्र में नहीं हैं तो स्थिति गंभीर होगी। उन्होंने कहा, बढ़ती असमानता और मुद्रास्फीति को देखते हुए, भारत को एक प्रभावी न्यूनतम मजदूरी नीति की आवश्यकता है जो आर्थिक रूप से खुद को बनाए रखने और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के ²ष्टिकोण में योगदान करने के लिए मजदूरी कमाने वालों के कमजोर निचले स्तर को लक्षित करे। राष्ट्रीय अनिवार्य वेतन को लागू करने में देरी ने केवल श्रम कल्याण को बाधित किया है। सत्पथी रिपोर्ट ने जुलाई 2018 तक भारत के लिए आवश्यकता-आधारित राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 375 रुपये प्रति दिन या 9,750 रुपये प्रति माह तय करने की सिफारिश की थी, भले ही 3.6 खपत इकाइयों वाले परिवार के लिए क्षेत्र, कौशल, व्यवसाय और ग्रामीण-शहरी स्थान कुछ भी हों। हालांकि, सिफारिशों को लागू करने से पहले, सरकार ने न्यूनतम वेतन पर विचार के लिए एक और विशेषज्ञ समूह के गठन की घोषणा की। विशेषज्ञ समूह को अपना काम पूरा करने में वर्षों लगने की संभावना है, इसलिए, सरकार को सत्पथी रिपोर्ट की सिफारिश के अनुसार न्यूनतम मजदूरी को संशोधित करना चाहिए ताकि कमजोर वर्ग को मूल्य वृद्धि और मुद्रास्फीति के खिलाफ सुरक्षा दी जा सके। –आईएएनएस पीटीके/आरजेएस




