नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार के पूर्णिया जिले की रुपौली विधानसभा सीट के लिए कल 10 जुलाई को उपचुनाव होना है। सत्ताधारी दल जदयू ने इस सीट से कलाधर मंडल को टिकट दिया है तो वहीं राजद ने लोकसभा चुनाव से पहले राज्यसभा से इस्तीफा देकर सत्ता में आईं बीमा भारती को इस सीट से उतारा है। बता दें कि बीमा भारती 2020 के चुनाव में जेडीयू की टिकट पर इसी सीट से जीत दर्ज की थीं। रुपौली उपचुनाव अब तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के नाक की लड़ाई बन गया है।
रुपौली उपचुनाव दोनों दलों के लिए है लिटमस टेस्ट
दरअसल लोकसभा चुनाव 2024 में जदयू और राजद दोनों को पूर्णिया लोकसभा सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा था। यहां से पप्पू यादव ने निर्दलीय जीत दर्ज की थी। अब 2025 विधानसभा चुनाव से पहले रुपौली उपचुनाव दोनों दलों के लिए लिटमस टेस्ट की तरह है। इसलिए दोनों दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रुपौली में जदयू उम्मीदवार के लिए प्रचार किया और इस दौरान बीमा भारती पर जमकर निशाना साधा।
नीतीश कुमार ने बीमा भारती पर साधा था निशाना
नीतीश कुमार ने कहा कि बीमा को उन्होंने तीन बार विधायक और राज्य सरकार में मंत्री बनाया। इतनी इज्जत दी फिर भी वो हमें छोड़कर भाग गईं। वहीं नीतीश कुमार के बयान पर बीमा भारती और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी पलटवार किया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार की जेडीयू ने अति पिछड़े की बेटी को अपमानित किया है।
लोकसभा चुनाव के नतीजों ने नीतीश का पलड़ा किया भारी
लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले नीतीश की साख कमजोर होने की चर्चा चल रही थी। एग्जिट पोल में भी जेडीयू को भारी नुकसान होने के अनुमान लगाये जा रहे थे। लेकिन इन सबको धता बताते हुए नीतीश कुमार ने बीजेपी के बराबर 12 सीटें जीत ली। वहीं आरजेडी ने सिर्फ 4 सीटों पर जीत दर्ज की।
तेजस्वी यादव ने लोकसभा चुनाव में नए समीकरण किये हैं सेट
लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद से नीतीश कुमार फिर से एक ब्रांड बनकर उभरे हैं। जहां कहा जा रहा है कि लोग नीतीश कुमार के नाम पर वोट करेंगे। तो वहीं तेजस्वी यादव ने भी इस लोकसभा चुनाव में नए समीकरण सेट किये थे। अब रुपौली उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए लिटमस टेस्ट के रूप में है। जहां पता चलेगा कि क्या सच में नीतीश कुमार अपने पुराने रंग में वापस आ चुके हैं। तो वहीं तेजस्वी यादव के लिए यह उपचुनाव नए समीकरण को आजमाने का मौका है। बता दें कि तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी भले ही 4 सीटें ही जीत पाई हो। लेकिन उन्होंने जेडीयू के कोर वोटर माने जाने वाले कुर्मी-कुशवाहा वर्ग में सेंधमारी करने में सफलता पाई है।
जाति समीकरणों का रखा है ध्यान
रुपौली उपचुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय है। जेडीयू ने इस सीट से गौता समुदाय के प्रत्याशी को उतारा है। तो वहीं आरजेडी ने भी इस सीट से गौता समुदाय से आने वाली बीमा भारती को ही अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं इस सीट पर शंकर सिंह निर्दलीय उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिए हैं। शंकर सिंह पूर्व विधायक हैं और वो 2020 में चिराग पासवान की पार्टी से मैदान में उतरे थे और दूसरे नंबर पर रहे।
इस चुनाव में पप्पू यादव ने बीमा भारती का समर्थन किया है। अब देखना ये होगा कि रुपौली उपचुनाव में मुस्लिम-यादव के साथ गौता वोट का गणित चलता है या सुशासन बाबू के चेहरे का जादू? यह 13 जुलाई को आने वाले उपचुनाव के नतीजे बतायेंगे।
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