नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। रतन टाटा के निधन के बाद से उनकी संपत्ति और वसीयत को लेकर खूब चर्चा होनी शुरू हो गयी थी। अधिकतर लोगों के मन में यही सवाल था कि अब रतन टाटा की संपति का मालिक कौन होगा? मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब रतन टाटा की वसीयत का खुलासा हो चुका है। रतन टाटा के पास कुल मिलाकर अनुमानित संपत्ति 10,000 करोड़ रुपये की थी।
संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा RTEF को जाएगा
रतन टाटा ने अपनी वसीयत को लागू करवाने की जिम्मेदारी अपनी सौतेली बहनों शिरीन और डायना जेजीभॉय, वकील दारायस खंबाटा और अपने करीबी दोस्त मेहली मिस्त्री को दी हुई थी। जो अब इस वसीयत पर काम करेंगे। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, रतन टाटा की वसीयत की सभी बातें सार्वजनिक नही हो पाई हैं, लेकिन उनकी संपति का एक बड़ा हिस्सा चैरिटी रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF) को जाएगा। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन का नेतृत्व करेंगे।
इन लोगों ने रतन टाटा की काफी लंबे समय से सेवा की है
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, रतन टाटा ने अपनी वसीयत में अपने भाई जिमी टाटा और सौतेली बहनों शिरीन और डीनना जेजीभॉय समेत परिवार के अन्य करीबी सदस्यों के लिए प्रावधान किए हुए हैं। रतन टाटा के वफादार घरेलू कर्मचारी भी इसमें शामिल हैं, जिसमे रतन टाटा के रसोइए राजन शॉ और बटलर सुब्बियाह का नाम भी शामिल है। इन लोगों ने रतन टाटा की काफी लंबे समय से सेवा की है।
शांतनु नायडू रतन टाटा के बहुत ही करीबी थे
रतन टाटा के युवा मित्र और कार्यकारी सहायक शांतनु नायडू को भी वसीयत का हिस्सा बनाया गया है। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, शांतनु नायडू के पर्सनल लोन को भी माफ कर दिया गया है, जो उन्होंने अपनी शिक्षा के लिए लिया था। इसके साथ ही शांतनु नायडू के सभी कारोबार गुडफेलो में टाटा ने अपनी हिस्सेदारी छोड़ दी है। रतन टाटा की वसीयत से यह तो साफ हो गया है कि शांतनु नायडू रतन टाटा के बहुत ही करीबी थे।
रतन टाटा ने वसीयत में अपने पालतू जर्मन शेफर्ड टीटो की आजीवन देखभाल की जिम्मेदारी राजन शॉ को सौपी है। बता दें कि रतन टाटा ने जर्मन शेफर्ड टीटो को 6 साल पहले गोद लिया था।




