नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के राजगढ़ इलाके में शनिवार सुबह बादल फटने से भारी तबाही मच गई। अचानक आए सैलाब और मलबे में कई घर दब गए। इस आपदा में 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
राहत-बचाव अभियान जारी
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल तुरंत मौके पर पहुंच गए और राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया। लेकिन लगातार भारी बारिश और दुर्गम पहाड़ी इलाकों की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में मुश्किलें आ रही हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगहों पर भेजा जा रहा है और उनके लिए अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं।
गांवों में भय का माहौल
घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई घर बह गए हैं, छोटे पुल और सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और नदी-नालों के पास न जाने की सलाह दी है। यह कोई पहली घटना नहीं है। 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चिशोटी गांव में बादल फटने से 65 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद कठुआ और रियासी जिलों में भी अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने कई लोगों की जान ले ली थी।
क्लाउडबर्स्ट क्या होता है?
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जब किसी छोटे क्षेत्र (20-30 वर्ग किलोमीटर) में एक घंटे के भीतर 10 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश होती है, तो उसे क्लाउडबर्स्ट कहा जाता है। यह घटना अक्सर पहाड़ी इलाकों में होती है। जब नमी से भरी हवाएं पहाड़ों से टकराती हैं और तेजी से ऊपर उठती हैं, तो ठंडी होकर घने बादल बना लेती हैं। बादल में पानी का भार असहनीय हो जाने पर अचानक भारी बारिश के रूप में गिरता है। इससे मिनटों में फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइड और मलबे का बहाव जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) के कारण क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाएं और अधिक बढ़ रही हैं।




