नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार और अयोध्या से पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का सोमवार को निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। मध्य प्रदेश के रीवा में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से अयोध्या, संत समाज और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका पार्थिव शरीर अयोध्या लाया जा रहा है, जहां पूरे धार्मिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाएगा।
रीवा में चल रही थी रामकथा, तभी बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, डॉ. वेदांती 10 दिसंबर को दिल्ली से रीवा पहुंचे थे, जहां वे रामकथा सुना रहे थे। इस दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
राम मंदिर आंदोलन का मजबूत चेहरा
डॉ. रामविलास दास वेदांती को राम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी नेताओं में गिना जाता था। उन्होंने 1980 के दशक से राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर देशभर में अभियान चलाया। वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े रहे और राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य भी थे। अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है।
बाबरी विध्वंस मामले में रहे आरोपी
6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचे के विध्वंस के मामले में डॉ. वेदांती का नाम विवादों में आया था। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि कारसेवकों ने ढांचा गिराया। इस मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया था, हालांकि बाद में सभी आरोपियों को अदालत से राहत मिल गई। राम भक्तों के बीच वे एक नायक के रूप में देखे जाते थे।
राजनीतिक जीवन भी रहा सक्रिय
डॉ. वेदांती ने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे 1996 और 1998 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा सांसद चुने गए। राम मंदिर आंदोलन की “राम लहर” का उन्हें राजनीतिक रूप से भी लाभ मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि डॉ. वेदांती का जाना आध्यात्मिक जगत और सनातन संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका त्यागमय जीवन सभी के लिए प्रेरणा रहेगा। डॉ. वेदांती ने 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 2024 में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा होना बताया था। अंतिम समय तक वे धार्मिक प्रवचन और रामकथा में सक्रिय रहे।





