नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। संसद सत्र के दूसरे दिन भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में अपना पूरा भाषण नहीं दे पाए। सांसदों के विरोध और हंगामे के बीच उन्होंने कहा, “मैं नेता प्रतिपक्ष हूं और मुझे बोलने का अधिकार है, लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है।” राहुल गांधी ने चीन और अमेरिका से जुड़े वैश्विक विवाद को आज का सबसे बड़ा मुद्दा बताया, जिस पर सदन में विवाद बढ़ गया।
स्पीकर ने नहीं दिया मौका, दूसरे सांसदों का नाम पुकारा
हंगामे के बीच पीठासीन स्पीकर ने राहुल गांधी को आगे बोलने की अनुमति नहीं दी और भाषण के लिए अन्य सांसदों के नाम पुकारे। हालांकि विपक्ष के कई सांसदों ने विरोध में बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और स्थिति बिगड़ने पर लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
किरण रिजिजू ने जताया विरोध
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार उन्हें सुनना चाहती थी, लेकिन वे बार-बार एक ही बात दोहरा रहे थे। उन्होंने कहा कि सदन में नियमों का पालन जरूरी है और किसी भी सदस्य को तय प्रक्रिया के अनुसार ही बोलना चाहिए। विरोध के बीच राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा उठाया है और अपने दावों के समर्थन में लेख का जिक्र किया है। उन्होंने मांग की कि उन्हें वह दस्तावेज सदन की टेबल पर रखने दिया जाए ताकि उसकी जांच हो सके।
विपक्षी सांसदों का हंगामा, टेबल पर चढ़े कई नेता
लगातार दूसरे दिन राहुल गांधी को बोलने का मौका न मिलने से विपक्षी सांसद भड़क गए। कुछ कांग्रेसी सांसद लोकसभा महासचिव की टेबल पर चढ़ गए और कागज फाड़कर चेयर की ओर उछाले। राजा वडिंग, मणिक्कम टैगोर और हाईबी ईडेन समेत कई नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। कुछ सांसदों ने स्पीकर की ओर लगे कैमरे को भी ब्लॉक करने की कोशिश की। संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद बाहर आकर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार उन्हें बोलने नहीं दे रही है। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी दबाव में हैं और विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यह समझौता चार महीने से अटका हुआ था और सरकार दबाव में फैसले ले रही है। चीन से जुड़े मुद्दे और ट्रेड डील पर बयानबाजी के बीच संसद का माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। सत्ता पक्ष नियमों के पालन की बात कर रहा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।




