नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र में वोटर्स की संख्या में अचानक बढ़ोतरी को लेकर सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे ‘वोट की चोरी’ करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को घेरा है। वहीं, सीएम फडणवीस ने भी पलटवार करते हुए कहा कि जिन इलाकों में मतदाता बढ़े, वहां तो कांग्रेस और शरद पवार गुट के नेता ही चुनाव जीते हैं।
राहुल गांधी का आरोप – वोटर लिस्ट में 8% की बढ़ोतरी, कुछ बूथों पर 50% तक इजाफा
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र में 5 महीनों में वोटर्स की संख्या 8% बढ़ गई। कुछ बूथों पर तो 20-50% तक का इजाफा हुआ है। बीएलओ ने फर्जी वोटिंग की सूचना दी और हजारों मतदाता बिना पते के लिस्ट में हैं। चुनाव आयोग या तो चुप है या शामिल!” उन्होंने इसे ‘वोट की चोरी’ बताया और कहा कि इन गड़बड़ियों को छुपाना ही स्वीकार करना है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा, मानता हूं कि हार की पीड़ा बढ़ती जा रही है, लेकिन हवा में तीर चलाना बंद करिए। जिन इलाकों में वोटर बढ़े, वहां तो आपकी ही पार्टी या सहयोगी जीते हैं। फडणवीस ने कुछ उदाहरण भी दिए पश्चिम नागपुर में 7% वोटर बढ़े, कांग्रेस के विकास ठाकरे जीते। उत्तर नागपुर में 7% वोटर बढ़े, नितिन राऊत (कांग्रेस) जीते। वड़गांव शेरी में 10% बढ़ोतरी, एनसीपी (शरद पवार गुट) के बापूसाहेब पठारे जीते। मालाड पश्चिम में 11% बढ़े, अस्लम शेख (कांग्रेस) जीते। मुंब्रा में 9% बढ़े, जितेंद्र आव्हाड (एनसीपी शरद गुट) जीते। फडणवीस ने तंज कसा कि, “राहुल गांधी कम से कम अपने सहयोगियों से बात तो कर लेते। इससे कांग्रेस में संवाद की कमी उजागर नहीं होती।
क्या कहता है चुनाव आयोग?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पूरे मामले पर चुप है या फिर मिलीभगत में शामिल है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मतदाता सूची में अचानक बदलाव सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इस मुद्दे पर खूब राजनीति होगी। महाराष्ट्र की राजनीति में अब वोटर डेटा को लेकर सीधा टकराव देखने को मिल रहा है। एक तरफ राहुल गांधी इसे चुनावी धांधली बता रहे हैं, तो दूसरी ओर देवेंद्र फडणवीस इसे बेकार का हंगामा बता रहे हैं। देखना होगा कि इस मुद्दे पर चुनाव आयोग आगे क्या कदम उठाता है।




