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Friday, March 13, 2026
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Pune Car Accident: चिकित्सा मंत्री और अस्पताल के डीन के बीच जुबानी जंग, किसके कहने पर रखा डॉक्टर तावड़े को?

मामले में ससून जनरल अस्पताल के डॉक्टर अजय तावड़े को हिरासत में ले लिया गया हैं। उनके ऊपर नाबालिग के बल्ड सैंपल बदलने का आरोप है। साथ ही एनसीपी के विधायक सुनील टिंगरे का नाम शामिल हुआ है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पुणे कार एक्टीडेंट मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। डॉक्टर विनायक काले, जो ससून अस्पताल के डीन हैं, उन्हें बुधवार को जबरन छुट्टी पर भेजा गया था। यह कदम तब उठाया गया जब अस्पताल के डॉक्टर अजय तावड़े का नाम नाबालिग के बल्ड सैंपल बदलने में सामने आया। डीन के अनुसार, डॉक्टर तावड़े को महाराष्ट्र सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री, हसन मुशरिफ की सिफारिश पर मेडिकल सुप्रिटेंडेंट के तौर पर रखा गया था।

किसने बदले बल्ड सैंपल?

नाबालिग के बल्ड सैंपल बदलने के आरोप डॉक्टर अजय तावड़े और एक अन्य डॉक्टर पर लगे हैं। बताया गया है कि यह एक कोशिश थी नाबालिग को बचाने की। पुलिस ने दोनों डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया है साथ ही अस्पताल के एक अन्य स्टाफ जिसका नाम अतुल घाटकांबले है, वह भी गिरफ्त में है। महाराष्ट्र सरकार ने तीनों को ही बुधवार को निलंबित कर दिया है। बताते चलें कि मामले में आरोपी डॉक्टर तावड़े पहले भी एक किडनी रैकेट का हिस्सा रह चुके है।

डॉक्टर अजय पहले से हैं बदनाम

बताते चलें कि डॉक्टर अजय तावड़े का नाम का 2022 के एक किडनी रैकेट में भी सामने आया था। उन्हें उस साल अपना पद छोड़ने के लिए कहा गया था, जब गैर कानूनी तरीके के अंग प्रत्यारोपण का मामला उजागर हुआ था। यह मामला रूबी हॉल क्लीनिक में हुआ था। रैकेट का पता तब चला जब एक महिला के डॉक्टर के खिलाफ किडनी देने के बदले 15 लाख रुपए देने का वादा किया। जिसके बाद महिला ने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दायर कर दी थी। डीएमईआर ने डॉक्टर तावड़े को ससून अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के पद से हटा दिया गया था लेकिन 29 दिसंबर 2023 को उन्होंने दोबारा पदभार संभाला।

राजनीतिक एंगल

हसन मुशरिफ, जो अजित पवार की पार्टी से रिश्ता रखते है और राज्य चिकित्सा मंत्री है, उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायक, सुनील टिंगरे के पत्र के बाद डॉक्टर तावड़े को नौकरी पर रखा गया था। उधर डीन का कहना है कि उनके पास कोई चमत्कारी शक्तियां नहीं हैं, जिससे वह अपने विभाग के हर शख्स के बारे में पूरी जानकारी रख सकें। तो वहीं, हसन मुशरिफ ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्होंने केवल विधायक के लिखे पत्र को मंजूरी दी थी। साथ ही बोले कि यह डीन की जिम्मेदारी है, उन्हें सरकार को डॉक्टर अजय तावड़े के बारे में पहले ही बताना चाहिए था, जब सिफारिश की गई थी। तो वहीं डीन ने भी साफ तौर पर कहा कि उन्होंने केवल मंत्री के आदेशों का पालन किया।

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