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Wednesday, March 18, 2026
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कांशीराम पर बयान को लेकर सियासत तेज: मंत्री असीम अरुण का राहुल गांधी पर हमला, कहा- इतिहास का ज्ञान नहीं

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के कांशीराम पर दिए बयान को लेकर यूपी की राजनीति गरमा गई है। मंत्री Asim Arun ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने जीते जी Kanshi Ram को कभी सम्मान नहीं दिया और अब वोट के लिए उनका नाम लिया जा रहा है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक Kanshi Ram की विरासत को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के एक बयान पर यूपी सरकार के मंत्री Asim Arun ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इतिहास और भूगोल की समझ नहीं है और वे सिर्फ वोट के लिए कांशीराम का नाम ले रहे हैं।

राहुल गांधी ने क्या कहा था

दरअसल, लखनऊ में आयोजित एक ‘संविधान सम्मेलन’ में राहुल गांधी ने कांशीराम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अगर Jawaharlal Nehru आज जीवित होते, तो कांशीराम को कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री बनाया गया होता। राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई और बीजेपी नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

असीम अरुण का पलटवार

राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए असीम अरुण ने कहा कि कांशीराम ने खुद कांग्रेस की नीतियों के विरोध में BSP की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को कांशीराम की लिखी किताब ‘चमचा युग’ पढ़नी चाहिए, जिसमें कांग्रेस द्वारा दलितों के शोषण का जिक्र किया गया है।

कांग्रेस दलित नेताओं को सिर्फ चाटुकार बनाना चाहती थी

असीम अरुण ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियां ऐसी थीं कि दलित नेता स्वतंत्र रूप से आगे नहीं बढ़ सकते थे। उन्होंने कहा, “कांग्रेस दलित समुदाय से ऐसे नेताओं को देखना चाहती थी जो सिर्फ उनकी हां में हां मिलाएं। कांशीराम जैसे नेता को कांग्रेस ने जीते जी सम्मान नहीं दिया। मंत्री ने यह भी कहा कि कांशीराम के मार्गदर्शन में बसपा ने तीन अलग-अलग मौकों पर BJP के साथ गठबंधन किया था। उनका कहना है कि अगर कांशीराम आज जीवित होते, तो वे संभवतः बीजेपी के साथ खड़े नजर आते। असीम अरुण ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही Samajwadi Party और कांग्रेस कांशीराम की विरासत पर दावा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस विरासत की असली हकदार बसपा प्रमुख Mayawati हैं, क्योंकि उन्होंने कांशीराम के साथ मिलकर दलित राजनीति को आगे बढ़ाया है और उनके विचारों को आगे ले जा रही हैं।

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