नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर मामला गरमा गया है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर कर उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है और प्रशासन उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जोधपुर ले जाने की तैयारी कर रहा है, जबकि इससे जुड़ा कोई डिटेंशन ऑर्डर अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
NSA के तहत गिरफ्तारी पर उठे सवाल
गीतांजलि आंग्मो ने याचिका में कहा है कि प्रशासन ने सोनम वांगचुक को जोधपुर स्थानांतरित करने की बात कही है, लेकिन हिरासत के लिए आवश्यक डिटेंशन ऑर्डर उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह पूरा प्रकरण लद्दाख प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों के खिलाफ एक लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की साजिश है। उन्होंने कहा, सोनम लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से लद्दाख के हितों के लिए लड़ रहे थे। उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक लोकतांत्रिक ढंग से शांतिपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, और उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। यह आंदोलन लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान, स्थानीय संसाधनों पर अधिकार और राजनीतिक स्वायत्तता की माँग को लेकर चल रहा है।
आंदोलन के दौरान हालात बिगड़े, चार प्रदर्शनकारियों की मौत
पिछले कुछ महीनों से चल रहे इस आंदोलन ने हाल ही में उग्र रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों में गोलीबारी हुई। इस दौरान चार प्रदर्शनकारी मारे गए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। इसके बाद प्रशासन ने वांगचुक को 26 सितंबर को हिरासत में ले लिया। उन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संबंध, विदेशों से अवैध फंडिंग और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इनके पक्ष में कोई स्पष्ट साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।
लद्दाख में आंदोलन और छठी अनुसूची की मांग
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को विशेष दर्जा दिलाने की मांग कर रहे हैं। उनका आंदोलन लद्दाख को राज्य का दर्जा देने के साथ-साथ संविधान की छठी अनुसूची के तहत शामिल करने पर केंद्रित है। छठी अनुसूची का महत्व इसलिए है क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्वायत्तता, सांस्कृतिक संरक्षण, स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण और स्वायत्त परिषद जैसे संवैधानिक अधिकार मिलते हैं।
पत्नी का आरोप – वांगचुक को फंसाने की हो रही साजिश
गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया कि वांगचुक और उनकी संस्था ‘हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लद्दाख’ (HIAL) के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश के तहत कार्रवाई की जा रही है, ताकि छठी अनुसूची की मांग को दबाया जा सके। उन्होंने कहा, सोनम का पाकिस्तान दौरा पूरी तरह एक पर्यावरणीय सम्मेलन के लिए था। उनका लद्दाख में पकड़े गए पाक एजेंट से कोई लेना-देना नहीं है।
”सोनम पर लगे गंभीर आरोप, पर साक्ष्य नहीं”
प्रशासन ने सोनम वांगचुक पर आरोप लगाया है कि वे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संपर्क में हैं और विदेशों से अवैध फंडिंग प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा उन पर विदेशी एजेंट के तौर पर काम करने का भी आरोप है। हालांकि, अब तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं जो इन आरोपों को साबित कर सकें। गीतांजलि आंग्मो ने कहा, सोनम का पाकिस्तान का दौरा एक पर्यावरण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए था, न कि किसी राजनीतिक साजिश के लिए।
सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद
गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि वांगचुक की हिरासत को अवैध घोषित करते हुए उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। मामले पर सुनवाई की उम्मीद है कि इसी सप्ताह की जाएगी।कोर्ट से उम्मीद जताई जा रही है कि वह इस मामले में उचित आदेश जारी करेगा और सोनम वांगचुक की हिरासत की वैधता पर फैसला देगा।
वांगचुक का लद्दाख आंदोलन में योगदान
मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोनम वांगचुक न केवल एक वैज्ञानिक हैं, बल्कि लद्दाख के युवाओं और किसानों के प्रेरणास्रोत भी रहे हैं। उन्होंने शिक्षा और जल संरक्षण के क्षेत्र में कई अभिनव प्रयोग किए हैं। उनका मानना है कि छठी अनुसूची के तहत लद्दाख को संवैधानिक संरक्षण ही वहां की संस्कृति और पर्यावरण को बचा सकता है।





