नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी जंग (Iran War) के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही दिन में पांच देशों के शीर्ष नेताओं से फोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया के हालात पर चिंता जताई और शांति की अपील की।
5 देशों के नेताओं से पीएम मोदी की बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर, फ्रांस, जॉर्डन, ओमान और मलेशिया के शीर्ष नेताओं से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते तनाव, ऊर्जा संकट और सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने सभी नेताओं से बातचीत में यह साफ कहा कि मौजूदा हालात में संवाद और कूटनीति के जरिए ही समाधान निकाला जा सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर खास जोर
ईरान जंग के चलते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया गया है, जो दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। इसी रास्ते से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस का व्यापार होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस रास्ते से सुरक्षित और मुक्त आवाजाही बनाए रखने पर जोर दिया और कहा कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।
एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की निंदा
पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकते हैं और इससे पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है। कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बातचीत में पीएम मोदी ने ईद की शुभकामनाएं दीं और कतर में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए आभार जताया। वहीं, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय से बातचीत में पीएम मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया और भारतीयों की सुरक्षित वापसी में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
फ्रांस, ओमान और मलेशिया से भी चर्चा
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत में दोनों नेताओं ने तनाव कम करने और शांति स्थापित करने पर सहमति जताई। ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से बात करते हुए पीएम मोदी ने क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान पर जोर दिया। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से बातचीत में भी दोनों नेताओं ने कूटनीति के जरिए शांति बहाल करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पहले भी कई बार हो चुकी है बातचीत
ईरान जंग शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं से लगातार संपर्क में हैं। कतर, जॉर्डन और ओमान के नेताओं से वह दो-दो बार बात कर चुके हैं। ईरान जंग के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ गई है। कई जगह एलपीजी और ईंधन को लेकर भी चिंता का माहौल बना हुआ है। ऐसे में भारत सरकार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय होकर हालात को संभालने की कोशिश कर रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की लगातार कूटनीतिक पहल इस बात का संकेत है कि भारत इस संकट को गंभीरता से ले रहा है और समाधान के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।




