नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को उडुपी स्थित प्राचीन श्री कृष्ण मठ पहुंचे, जहां उन्होंने आध्यात्मिक माहौल में आयोजित “लक्ष गीता पाठन” में शामिल होकर भक्तों के साथ गीता के श्लोकों का पाठ सुना और इसका जाप किया। इस दिव्य आयोजन में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से गीता का जप किया। प्रधानमंत्री ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और पर्याय स्वामीजी से आशीर्वाद प्राप्त किया। बता दें कि उडुपी का पीएम मोदी का यह तीसरा दौरा है। प्रधानमंत्री ने पहली बार 1993 में यहां कदम रखा था, जबकि 2008 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने श्री कृष्ण मंदिर का दौरा किया था। इस यात्रा में उन्होंने महान दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु श्री माधवाचार्य को भी नमन किया।
“एक लाख स्वर जब एक हुए, तो सहस्त्र वर्षों की दिव्यता साकार हो उठी”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गुरुओं की उपस्थिति उनके लिए विशेष सौभाग्य का क्षण है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही वह कुरुक्षेत्र में थे, और अब यहां आकर उन्होंने फिर वही आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब एक लाख से अधिक लोगों की आवाज़ एक साथ गीता के श्लोकों में गुंजित हुई, तो ऐसा लगा मानो भारत की सहस्त्रों वर्षों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा प्रत्यक्ष रूप से साकार हो उठी हो। उन्होंने यह भी याद किया कि पिछले वर्ष वह द्वारकाधीश के समुद्र के भीतर स्थित स्थल के दर्शन करके लौटे थे, जहां से उन्हें दिव्य आशीर्वाद प्राप्त हुआ था।
“श्रीकृष्ण के उपदेशों से ही जनकल्याण और नारी सुरक्षा का मिलता है ज्ञान”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाएँ आज भी शासन और समाज के मार्गदर्शन का आधार बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ जैसे राष्ट्रीय संकल्प भी गीता के उन्हीं सिद्धांतों से प्रेरित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण जरूरतमंदों की सेवा और गरीबों के उत्थान का संदेश देते हैं और इसी सोच से आयुष्मान भारत और पीएम आवास जैसी योजनाओं की नींव रखी गई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भगवान श्रीकृष्ण नारी सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण का जो मार्ग दिखाते हैं, उसी की प्रेरणा से देश ने नारीशक्ति वंदन अधिनियम जैसे ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
“गीता बताती है शांति के लिए अत्याचारियों का अंत अनिवार्य”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संदेश सर्वजन कल्याण की भावना से भरा है और यही सोच वैक्सीन मैत्री, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जैसी भारत की पहलों को दिशा देती है। उन्होंने याद दिलाया कि गीता का उपदेश स्वयं युद्धभूमि में दिया गया था, जो हमें सिखाता है कि सत्य और शांति की रक्षा के लिए अन्याय और अत्याचार का अंत करना भी उतना ही आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा नीति भी इसी दर्शन पर आधारित है, हम विश्व को परिवार मानते हैं, लेकिन साथ ही ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ के सिद्धांत पर दृढ़ रहते हैं। उन्होंने बताया कि लाल किले से जहां हम श्रीकृष्ण की करुणा का संदेश साझा करते हैं, वहीं उसी प्राचीर से मिशन ‘सुदर्शन चक्र’ जैसे निर्णायक संकल्पों की घोषणा भी करते हैं।
उडुपी की भूमिका ने राम मंदिर आंदोलन को दी नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उडुपी ने लगभग पचास वर्ष पहले प्रशासन का एक अनोखा मॉडल देश के सामने रखा था। उन्होंने बताया कि राम जन्मभूमि आंदोलन में उडुपी की सक्रिय भूमिका से पूरा देश भली-भांति परिचित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री विश्वेश तीर्थ स्वामीजी के मार्गदर्शन और संकल्प के कारण ही आज अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर ध्वज लहरा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि राम मंदिर में एक विशेष द्वार भी बनाया गया है, जो अद्वैताचार्य श्री माधवाचार्य को सम्मानस्वरूप समर्पित है।
“गीता की शिक्षाएं आज भी मार्गदर्शक
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उडुपी मंदिर की प्रसिद्ध “कनक विंडो” से श्रीकृष्ण के दर्शन उन्हें संत कवि कनकदास की भक्ति और समर्पण की याद दिलाते हैं। उन्होंने गीता के महत्व पर बात करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश आज भी उतने ही सार्थक हैं जितने सदियों पहले थे। प्रधानमंत्री ने बताया कि गीता हमें लोक कल्याण, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है, और श्रीकृष्ण का यही संदेश आज भी समाज और राष्ट्र निर्माण में मार्गदर्शक बना हुआ है।




