नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल एक बार फिर शर्मसार हो गया है। दुर्गापुर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में MBBS की छात्रा के साथ रेप की वारदात ने राज्य को झकझोर दिया है। यह घटना पिछले साल हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस की याद ताजा कर रही है, जिसमें एक जूनियर डॉक्टर से रेप और हत्या की गई थी।
कैंपस के पास से खींचकर ले गया आरोपी
जानकारी के मुताबिक, पीड़िता ओडिशा के जलेश्वर की रहने वाली है और दुर्गापुर के शौभापुर इलाके में स्थित निजी मेडिकल कॉलेज में द्वितीय वर्ष की छात्रा है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे वह अपने क्लासमेट के साथ कैंपस के बाहर खाने गई थी। लौटते वक्त 2-3 युवक रास्ते में आए इनमें से एक ने छात्रा का मोबाइल फोन छीन लिया, जबकि दूसरा उसे सुनसान जगह पर घसीटकर ले गया और रेप किया।
वारदात के बाद पीड़िता को उसी कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया
साथी छात्र की भूमिका पर भी संदेह में है। पुलिस ने बताया कि पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है और गैंगरेप की शिकायत पर जांच जारी है। साथ ही, पीड़िता के साथ गए छात्र की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि जल्द ही संदिग्धों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी।
राष्ट्रीय महिला आयोग हरकत में
घटना की गूंज दिल्ली तक पहुंची है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए शनिवार (11 अक्टूबर, 2025) को दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज का दौरा करने की घोषणा की है।
आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार ने कहा,राज्य में ऐसी घटनाएं इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि अपराधियों को दंड नहीं मिलता। यह लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने मांगी रिपोर्ट
स्वास्थ्य शिक्षा निदेशक इंद्रजीत साहा ने कॉलेज प्रशासन से तत्काल रिपोर्ट तलब की है।स्वास्थ्य भवन सूत्रों के मुताबिक, पुलिस जांच की प्रगति पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि मामले को दबाने की कोई कोशिश न हो।
पिता ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
घटना के बाद पीड़िता के पिता ने भावुक होकर कहा, अगर कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था होती, तो मेरी बेटी आज इस हालत में नहीं होती। दूसरी ओर, मेडिकल कॉलेज परिसर में छात्रों ने मौन प्रदर्शन कर प्रशासन और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
राज्य में बढ़ते यौन अपराधों पर गुस्सा
आरजी कर केस के बाद अब दुर्गापुर की यह वारदात फिर से बंगाल की महिला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। लोगों का कहना है कि जब मेडिकल कॉलेज जैसी संवेदनशील जगहें भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम महिलाएं कैसे निश्चिंत रहें?





