नई दिल्ली, 24 मई (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की गई है कि कोरोना के कम लक्षणों वाले मरीजों को दी जानेवाली दवाओं के प्रोटोकॉल में बदलाव किया जाए। याचिका में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत स्टेरॉयड और एंटीबॉयोटिक्स पर रोक लगाने की मांग की गई है। हाईकोर्ट इस याचिका पर कल यानी 25 मई को सुनवाई करेगा। याचिका चार लोगों ने दायर की है। जिन लोगों ने याचिका दायर की है उनमें निर्माया रिसर्च के चेयरमैन विवेक शील अग्रवाल, ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर संजय जैन, पैडियाट्रिक्स डॉक्टर अनु गर्ग और स्वतंत्र रिसर्चर भवसर अग्रवाल शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील प्रवीण के शर्मा और अमितेश बख्शी ने कहा है कि कोरोना प्रोटोकॉल जारी करते समय उनका क्लीनिकल ट्रायल नहीं किया गया है। याचिका में कहा गया है कि जानवरों से संबंधित सभी मेडिकल साहित्य और क्लीनिकल ट्रायल वर्तमान प्रोटोकॉल से संबंधित दवाओं के विपरीत हैं। निर्माया रिसर्च के मुताबिक जो दवाएं चलाई जा रही हैं वे शरीर के इम्युन सिस्टम को बुरे तरीके से प्रभावित करती हैं। इनकी वजह से मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। याचिका में आईसीएमआर से मांग की गई है कि दवाओं का क्लीनिकल ट्रायल किया जाए और उसके बाद प्रोटोकॉल में बदलाव किया जाए। याचिका में कहा गया है कि बहुत से डॉक्टर आईसीएमआर के प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते हैं, जैसे कम लक्षणों वाले मरीजों को स्टेरॉयड और एंटीबॉयटिक नहीं देते हैं। ऐसी परिस्थिति में आईसीएमआर को कोरोना के कम लक्षणों वाले मरीजों के प्रोटोकॉल में बदलाव लाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं ने संबंधित पक्षों से इसे लेकर प्रतिवेदन दिया था लेकिन उस पर विचार ही नहीं किया गया। हिन्दुस्थान समाचार/संजय




