नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। संसद के शीतकालीन सत्र में आज 13वें दिन राज्यसभा सभापति को पद से हटाने के लिए विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया है। संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हो गई है। लोकसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है।
संसद के दोनों सदनों में अडानी और सोरोस मुद्दे को लेकर जारी गतिरोध के बीच विपक्ष राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ को पद से हटाने की मांग को लेकर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। विपक्षी सदस्यों ने एक दिन पहले ही अविश्वास प्रस्ताव लाने की सूचना दी थी।
“नेता सदन को 10-10 मिनट बोलने दिया जाता है”
सत्र के दौरान विपक्ष ने सभापति पर पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्यों को नियमों के विपरीत बोलने की अनुमति दी जा रही है। नासिर हुसैन ने कहा कि विपक्ष के नेताओं को दबाया जाता है। विपक्ष के नेता जब बोलने के लिए खड़े होते हैं तो 10-20 सेकंड में माइक बंद कर सदन स्थगित कर दिया जाता है और नेता सदन को 10-10 मिनट बोलने दिया जाता है।
“इस तरह के एक्शन को स्वीकार न किया जाए”
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि एनडीए के पास बहुमत है, यह प्रस्ताव रद्द हो जाएगा। हम सुनिश्चित करेंगे कि इस तरह के एक्शन को स्वीकार न किया जाए।
किरण रीजिजू ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को हटाने के लिए विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा नोटिस सौंपने के कदम को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि सरकार को धनखड़ पर गर्व है। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पदेन सभापति बहुत पेशेवर और निष्पक्ष हैं। पहली बार इंडिया गठबंधन के दलों ने राज्यसभा में धनखड़ को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पेश किया।
“नोटिस को खारिज किया जाना चाहिए”
रिजिजू ने आगे कहा कि विपक्षी दलों को इसे पारित कराने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता होगी, लेकिन 243 सदस्यीय सदन में उनके पास अपेक्षित संख्या नहीं है। रिजिजू ने कहा कि NDA के पास राज्यसभा में बहुमत है। नोटिस को खारिज किया जाना चाहिए।
पहली बार सभापति के खिलाफ प्रस्ताव
गौरतलब है कि पहला मौका है जब राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इस अविश्वास प्रस्ताव पर 60 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके पहले मानसून सत्र में भी धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विपक्षी दलों के बीच सहमति बनी थी, लेकिन बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। संविधान के अनुच्छेद 67B में अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र किया गया है।
14 दिन पहले नोटिस जरूरी
नियम के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी है। ऐसे किसी प्रस्ताव को लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। फिलहाल इस प्रस्ताव के पारित होने की उम्मीद नहीं है, कि राज्यसभा में विपक्ष के पास 103 सीटें हैं और प्रस्ताव को पारित कराने के लिए 126 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।




