नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र में एक बार मराठा आरक्षण की मांग का मुद्दा जोर पकड़ रहा है। आज एक बार फिर मनोज जारंगे पाटिल ने मराठा आरक्षण को लागू करने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। वह अंतरवाली सैराट गांव में आमरण अनशन पर बैठे हैं। लेकिन पुलिस ने जारंगे को अनशन की इजाजत नहीं दी है। इससे पहले भी मनोज जारंगे पाटिल आरक्षण की मांग को लेकर अनशन पर बैठ चुके हैं। प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपना आंदोलन खत्म कर दिया था। लेकिन चुनाव खत्म होते ही प्रदेश में मराठा आरक्षण की मांग का मुद्दा एक बार फिर से उठ गया है।
पुलिस ने नहीं दी थी अनशन की अनुमति
गौरतलब है कि इससे पहले मनोज जरांगे पाटिल ने पुलिस से जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में आंदोलन करने की अनुमति मांगी थी। जिसके बद पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था। वहीं, मनोज जरांगे अपने आंदोलन करने के फैसले पर अडिग थें। लेकिन जरांगे के आंदोलन को लेकर आसपास के गांवों और अंतरवाली सराटी गांव के उपसरपंच सहित 70 लोगों ने प्रशासन से निवेदन किया था कि मराठा आंदोलन की वजह से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने जरांगे पाटिल को आमरण अनशन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
नौकरियों और शिक्षा में मिले आरक्षण- जारंगे पाटिल
आपको बता दें कि इससे पहले भी मनोज जारंगे पाटिल मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनशन किया था। उसके बाद राज्य में लोकसभा चुनाव के कारण और महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनकी मांगे मान जाने को लेकर उन्होंने अनशन को समाप्त करा दिया था। उस समय जारंगे पाटिल की मुख्य मांग थी कि जिनके पास कुनबी प्रमाण पत्र है, उनके जीवनसाथियों को भी कुनबी प्रमाण पत्र दिया जाए। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार में मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि कार्यकर्ता की मांगें स्वीकार कर ली गई हैं और उन्हें सरकारी प्रक्रिया के अनुसार पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि अब तक 37 लाख कुनबी प्रमाण पत्र दिये जा चुके हैं और यह संख्या 50 लाख तक जायेगी। हालांकि मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जारंगे पाटिल ने कहा था कि जब तक समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक वह अपना आंदोलन बीच में समाप्त नहीं करेंगे।
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