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Thursday, April 2, 2026
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Nuclear Power History: भारत के पहले रिएक्टर से आज भी बिजली का उत्पादन जारी, जानिेए कब हुई थी स्थापना

भारत का पहला परमाणु संयंत्र तारापुर एनर्जी स्टेशन महाराष्ट्र में 1969 में स्थापित हुआ। यह संयंत्र अब यूनिट 1 से 160 मेगावाट और यूनिट 2 के जुड़ने के बाद 200 मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन करेगा।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हमेशा विज्ञान और तकनीक के माध्यम से अपने ऊर्जा संसाधनों को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने का प्रयास किया है। इसी प्रयास का प्रमुख उदाहरण है भारत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र, जिसे 1969 में स्थापित किया गया था। यह संयंत्र केवल बिजली उत्पादन का साधन नहीं था, बल्कि उस समय आधुनिक तकनीक में देश की उपलब्धियों का प्रतीक भी माना गया।

भारत का पहला परमाणु संयंत्र: तारापुर

भारत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र Tarapur Atomic Power Station महाराष्ट्र के पालघर जिले में, मुंबई के पास स्थित है। इसे 28 अक्टूबर 1969 को शुरू किया गया था। इस संयंत्र की स्थापना का उद्देश्य देश को स्वच्छ और लॉन्ग टर्म ऊर्जा उपलब्ध कराना था। तारापुर में दो उबलते जल रिएक्टर (BWR) लगे हुए थे, जिनकी कुल क्षमता लगभग 200 मेगावाट थी। जब यह संयंत्र चालू हुआ, तब यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा स्टेशन था। इस संयंत्र के माध्यम से भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता साबित की और दुनिया के सामने अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियां प्रस्तुत की।

तारापुर संयंत्र का वर्तमान बिजली उत्पादन

Tarapur Atomic Power Station की यूनिट 1 अब 160 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है, जबकि यूनिट 2 का नवीनीकरण अंतिम चरण में है। जब यह जुड़ जाएगी, तो कुल उत्पादन 200 मेगावाट से अधिक हो जाएगा। यूनिट 1 का नवीनीकरण छह साल में पूरा हुआ, जिसमें रिएक्टर पाइपिंग, टरबाइन जनरेटर, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, 3डी लेजर स्कैनिंग, जंग-रोधी सामग्री, नई सुरक्षा प्रणालियां और कंट्रोल रूम का आधुनिकीकरण शामिल था। यह पूरी तरह भारतीय तकनीक से पुरानी यूनिट को नया जीवन देने का पहला प्रयास है। संयंत्र का संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) करता है।

भारत की एनर्जी सुरक्षा और स्वच्छ एनर्जी में योगदान

Tarapur Atomic Power Station के नवीनीकरण और नई तकनीक ने बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ देश को स्वच्छ और टिकाऊ एनर्जी में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम हुई है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, तारापुर की सफलता भविष्य में पुराने रिएक्टरों के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए एक मार्गदर्शक साबित होगी, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता दोनों मजबूत होंगी।

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