नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कुछ दिनों पहले एक कविता से चर्चा में आए जेडीयू नेता व बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री अशोक चौधरी का प्रमोशन हो गया है। उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया है। बता दें कि, कुछ दिनों पहले अशोक चौधरी ने एक्स पर एक कविता शेयर की थी। जिसे बताया गया कि अशोक चौधरी ने ये कविता नीतीश कुमार को लेकर लिखी है। इसके बाद सियासी गलियारों में अशोक चौधरी के पाला बदलने की चर्चाएं तेज हो गईं। कयास लगाये जा रहे थे कि अशोक चौधरी नीतीश को छोड़कर चिराग पासवान के साथ जाने वाले हैं। हालांकि अब नीतीश कुमार ने अशोक चौधरी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी देकर विरोधियों का मुंह बंद कर दिया है।
क्यों पार्टी से चल रहे थे नाराज?
दरअसल 31 अगस्त को अशोक चौधरी जहानाबाद में जदयू के क्षेत्रीय कार्यालय के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भूमिहार जाति पर एक विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि”मैं भूमिहारों को अच्छे से जानता हूं। जब लोकसभा चुनाव हुआ था तो इस जाति के लोग नीतीश कुमार का साथ छोड़कर भाग गए थे” जिसके बाद सियासी हलकों में भारी बवाल हो गया। अशोक चौधरी के इस बयान पर जहां राजद के भूमिहार जाति के नेताओं ने अशोक चौधरी और नीतीश कुमार पर जमकर हमला किया था। वहीं बीजेपी के नेताओं ने भी उनके इस बयान की कड़ी आलोचना की थी। जिसके बाद जदयू ने अशोक चौधरी के बयान से किनारा कर लिया और उन्हें नसीहत दी थी। जिसके बाद से ही अशोक चौधरी पार्टी से नाराज बताये जा रहे थे।
अशोक चौधरी ने शेयर की थी कविता
पार्टी का साथ नहीं मिलने पर अशोक चौधरी ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक कविता शेयर किया था। जिसका टाइटल था ‘बढ़ती उम्र में इन्हें छोड़ दीजिये’। अशोक चौधरी ने कविता में लिखा था-
एक दो बार समझाने से यदि कोई नहीं समझ रहा है तो सामने वाले को समझाना, “छोड़ दीजिए।”
बच्चे बड़े होने पर वो ख़ुद के निर्णय लेने लगे तो उनके पीछे लगना, ”छोड़ दीजिए।”
गिने चुने लोगों से अपने विचार मिलते हैं, यदि एक दो से नहीं मिलते तो उन्हें, ”छोड़ दीजिए।”
एक उम्र के बाद कोई आपको न पूछे या कोई पीठ पीछे आपके बारे में गलत कह रहा है तो दिल पर लेना, ”छोड़ दीजिए।”
अपने हाथ कुछ नहीं, ये अनुभव आने पर भविष्य की चिंता करना, ”छोड़ दीजिए।”
यदि इच्छा और क्षमता में बहुत फर्क पड़ रहा है तो खुद से अपेक्षा करना, ”छोड़ दीजिए।”
हर किसी का पद, कद, मद, सब अलग है इसलिए तुलना करना, ”छोड़ दीजिए।”
बढ़ती उम्र में जीवन का आनंद लीजिए, रोज जमा खर्च की चिंता करना, ”छोड़ दीजिए।”
उम्मीदें होंगी तो सदमे भी बहुत होंगे, यदि सुकून से रहना है तो उम्मीदें करना, ”छोड़ दीजिए।”
नीतीश कुमार से मिलकर दूर की खटास
अशोक चौधरी की इस कविता के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं कि अशोक चौधरी और जदयू नेतृत्व के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। जिसके बाद उन्हें नीतीश कुमार ने तलब किया। जब अशोक चौधरी नीतीश कुमार से मिलकर बाहर निकले तो उनकी भाव भंगिमा बदल चुकी थी। उन्होंने नीतीश कुमार को अपना मानस पिता बताकर मामले का पटाक्षेप कर दिया था। जिसके बाद अब नीतीश कुमार ने अशोक चौधरी को जदयू राष्ट्रीय महासचिव पद की नई जिम्मेदारी दी है।




