नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद अब उनके बेटे Nishant Kumar के राजनीति में आने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि निशांत कुमार 8 मार्च को औपचारिक रूप से JDU की सदस्यता ले सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें नई सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की भी चर्चा है।
बैठक में भावुक हुए नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री आवास पर जेडीयू के विधायकों और मंत्रियों की अहम बैठक हुई। इस दौरान कई नेताओं ने नीतीश कुमार से राज्यसभा जाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में भावुक होते हुए Nitish Kumar ने कहा, “अब मुझे जाने दीजिए, विरोध मत करिए. मैं राज्यसभा जा रहा हूं, लेकिन वहां से भी बिहार पर नजर रखूंगा। बताया जाता है कि इस दौरान कई विधायक भावुक होकर रो पड़े।
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री
बैठक में सबसे बड़ा फैसला निशांत कुमार के राजनीति में आने को लेकर हुआ। विधायकों की मांग और सहमति के बाद तय किया गया कि Nishant Kumar 8 मार्च को जेडीयू की सदस्यता लेंगे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है और साथ ही गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।
अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है। इस बीच जेडीयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका अंतिम फैसला खुद Nitish Kumar ही करेंगे। इधर सरकार गठन और सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच भाजपा के नेताओं की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary और Vijay Kumar Sinha ने हाल ही में नीतीश कुमार से मुलाकात की है। इन मुलाकातों के बाद बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हालांकि पार्टी के अंदर हो रहे इन बड़े बदलावों से कई जेडीयू कार्यकर्ता नाराज नजर आ रहे हैं। पटना में पार्टी कार्यालय के बाहर समर्थकों ने प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के पोस्टर पर कालिख पोत दी और नीतीश कुमार से अपने फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की। अब सभी की नजरें 8 मार्च को होने वाली निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री और 10 से 14 मार्च के बीच होने वाले संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं





