नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ कानून को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बीजेपी ने ममता बनर्जी की सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस हिंसा में हिंदुओं को निशाना बनाकर मारा गया और टीएमसी नेता इसमें शामिल थे।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में कई खुलासे
कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने हाल ही में मुर्शिदाबाद हिंसा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमलावरों ने अपने चेहरे मास्क से ढके हुए थे ताकि पहचान न हो सके। स्थानीय पार्षद महबूब आलम हिंसा भड़काने वालों के साथ मौजूद था। हमलों में धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाया गया।
BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस – “हिंदुओं पर हमला, सरकार मौन”
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा: “इस हिंसा ने टीएमसी और इंडिया गठबंधन के कथित धर्मनिरपेक्षता के चेहरे से नकाब हटा दिया है। हिंसा में चुन-चुनकर हिंदुओं को मारा गया और उनके घर तोड़े गए। बीजेपी का कहना है कि इस हिंसा में 113 घरों को पूरी तरह से नुकसान पहुंचाया गया। कई परिवारों को इलाका छोड़कर पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा। जब लोगों ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई, तब भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
TMC नेताओं पर आरोप – विधायक मौके से लौट गए
बीजेपी ने आरोप लगाया कि जब हिंसा हो रही थी, स्थानीय विधायक मौके पर पहुंचे लेकिन तोड़फोड़ देखकर भी कुछ नहीं किया और लौट गए। टीएमसी की तरफ से यह कहकर झूठ फैलाया गया कि हमलावर बाहरी लोग थे, लेकिन रिपोर्ट में स्थानीय टीएमसी नेताओं का नाम साफ-साफ लिखा है।
“क्या ममता अपने नेताओं पर कार्रवाई करेंगी?” – BJP का सवाल
बीजेपी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा कि क्या वे अपने उन नेताओं पर कार्रवाई करेंगी जिनका नाम रिपोर्ट में है? या फिर वे हिंदुओं को असुरक्षित छोड़ देंगी? बीजेपी ने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का कहना है कि हिंसा के समय पुलिस नदारद थी। या तो उन्हें राजनीतिक दबाव में चुप रहने को कहा गया, या फिर वे खुद षड्यंत्र का हिस्सा थीं। मुर्शिदाबाद की हिंसा अब सियासी रंग ले चुकी है। बीजेपी जहां इसे हिंदुओं पर सुनियोजित हमला बता रही है, वहीं ममता सरकार की ओर से अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। हिंसा की जांच के साथ अब सवाल उठ रहा है – क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या राजनीति हावी रहेगी?




