नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । मध्य प्रदेश पुलिस ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक बयान देने के आरोप में भाजपा मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने शाह की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के अंतरिम निर्देश को बरकरार रखा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले का खुद संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को इस मामले में लंबित कार्यवाही बंद करने का निर्देश दिया है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पिछले आदेश के अनुसार शाह के मामले की जांच के लिए तीन अधिकारियों वाली एक विशेष जांच टीम गठित की गई है और जांच जारी है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के पुलिस उप महानिरीक्षक द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट का संज्ञान लिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि, “एसआईटी ने 21 मई को घटनास्थल का दौरा किया और जांच की। इसके बाद कुछ और सबूत जुटाए गए। अन्य चीजों के अलावा एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। चूंकि इस मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए जांच के लिए और समय दिया जाना चाहिए।” शाह द्वारा दायर दो याचिकाओं की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और दीपांकर दत्ता की पीठ के समक्ष हुई। इनमें से पहली याचिका में शाह ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कर्नल सोफिया कुरैशी को “आतंकवादियों की बहन” कहने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था।
गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए देने वाली विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ कर्नल सोफिया कुरैशी भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का चेहरा बनीं। इसके बाद 12 मई को मऊ में एक कार्यक्रम में बोलते हुए विजय शाह ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखा दिया है। उन्होंने कहा था कि “भारत ने पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को उनकी बहन के माध्यम से सबक सिखाया है”। हालांकि विजय शाह ने इस समय किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उनकी आलोचना कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर थी।





