नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र की सियासत में उस वक्त हलचल मच गई जब मंत्री छगन भुजबल कैबिनेट बैठक शुरू होने से पहले ही नाराज होकर बाहर निकल गए। बुधवार को होने वाली बैठक से पहले छगन भुजबल गुस्से में नजर आए। सूत्रों के मुताबिक, उनकी नाराजगी मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर है।
बताया जा रहा है कि छगन भुजबल सरकार के रुख से असहमति जता रहे हैं और इसी कारण बैठक से पहले ही बाहर निकल गए। छगन भुजबल उपमुख्यमंत्री अजित पवार के गुट वाली एनसीपी के वरिष्ठ नेता हैं और पहले भी आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते आए हैं। फिलहाल, उनकी इस नाराजगी को सरकार के भीतर गहराते मतभेदों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
OBC आरक्षण पर सख्त हुए छगन भुजबल
मराठा आरक्षण को लेकर जारी सियासी हलचल के बीच मंत्री छगन भुजबल बुधवार को बांद्रा स्थित MET शिक्षा संस्थान के लिए रवाना हुए, जहां वे ट्रस्टी की भूमिका निभाते हैं। इससे पहले मंगलवार, 2 सितंबर को छगन भुजबल ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर मराठा समुदाय को आरक्षण देने के प्रयास में ओबीसी वर्ग के मौजूदा आरक्षण में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गई, तो इसका जोरदार विरोध किया जाएगा।
छगन भुजबल की इस चेतावनी से पहले सोमवार, 1 सितंबर को उन्होंने ओबीसी समुदाय के प्रमुख नेताओं के साथ एक अहम बैठक की थी, जिसमें आरक्षण को सुरक्षित रखने की रणनीति पर चर्चा की गई थी। ओबीसी आरक्षण को लेकर उनकी सख्त प्रतिक्रिया ने सरकार के भीतर दबाव बढ़ा दिया है, खासकर जब मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गर्माया हुआ है।
“जरांगे का आंदोलन भटका, मराठा-कुनबी एक नहीं” -छगन भुजबल
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच मंत्री छगन भुजबल ने बड़ा बयान देते हुए मराठा समुदाय को ओबीसी दर्जा दिए जाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 374 समुदायों के लिए महज 17 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण उपलब्ध है, ऐसे में इसमें कोई छेड़छाड़ संभव नहीं है।
छगन भुजबल ने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के कोटे में मराठा समुदाय के करीब 8 प्रतिशत लोग पहले से ही लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “जरांगे के नेतृत्व में आंदोलन अपनी दिशा खो चुका है। यह कहना कि मराठा और कुनबी एक ही हैं, मूर्खता है। हाई कोर्ट भी इसे खारिज कर चुका है।”
छगन भुजबल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा जारी उस सरकारी आदेश (जीआर) का अध्ययन कर रहे हैं, जिसमें मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र देने की बात कही गई है, बशर्ते उनके पास संबंधित दस्तावेज हों। उनके इस बयान से यह साफ है कि ओबीसी नेताओं में मराठा आरक्षण को लेकर गहरी असहमति है और राजनीतिक तापमान फिलहाल और चढ़ने के आसार हैं।




