नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित बड़ी रैली में मायावती ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। चार बार यूपी की मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती ने कहा कि कांशीराम की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि इसलिए नहीं दे पा रहे थे क्योंकि स्थल की मरम्मत नहीं हुई थी। उन्होंने योगी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने मरम्मत के लिए पूरा बजट खर्च किया, जबकि सपा सरकार ने एक पैसा भी इन स्थलों के रख-रखाव पर नहीं लगाया।
मायावती ने कहा कि उनकी सरकार ने टिकट सिस्टम से आने वाली राशि से रख-रखाव की व्यवस्था की थी, लेकिन सपा ने उस पैसे का इस्तेमाल नहीं किया। बाद में बसपा ने योगी सरकार को पत्र लिखकर मरम्मत की मांग की, जिसे उन्होंने पूरा किया। सपा पर निशाना साधते हुए मायावती बोलीं “जब ये सत्ता में थे, तब हमारे गुरु, संत और महापुरुष याद नहीं आए। अब विपक्ष में हैं तो PDA याद आ रहा है।” उन्होंने पूछा “सत्ता में रहते PDA कहां था?” अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा “हमने कासगंज का नाम बदलकर कांशीराम के नाम पर रखा था, लेकिन सत्ता में आते ही सपा सरकार ने वह नाम बदल दिया।”
सत्ता में रहते अपने महापुरुषों को दिया पूरा सम्मान – मायावती
मायावती ने लखनऊ रैली में कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में रहते महात्मा फुले, नारायण गुरु और बाबा साहब आंबेडकर जैसे महापुरुषों को पूरा सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि यह बात जातिवादी पार्टियों को रास नहीं आती, खासकर सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आज ये पार्टियां PDA के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही हैं।
मायावती ने आरोप लगाया कि सपा शासन में दलितों और पिछड़ों का शोषण हुआ है। उन्होंने बाबा साहब आंबेडकर को उद्धृत करते हुए कहा कि सत्ता मास्टर चाबी है, जिससे वंचित वर्ग अपने जीवन को खुशहाल और स्वाभिमान से जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब के सपनों को साकार करने के लिए कांशीराम ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। बसपा ने न सिर्फ यूपी में कई बार सरकार बनाई, बल्कि दूसरे राज्यों में भी विधायक और सांसद जिताकर दलित आंदोलन को आगे बढ़ाया।
मायावती ने कहा कि कांशीराम की इच्छा थी कि बहुजन समाज खुद की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाए। हालांकि, उनके जीवनकाल में यह सपना पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि मैंने उनके निधन के बाद वह सपना साकार किया, जब 2007 में अकेले दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। संबोधन की शुरुआत में मायावती ने भारी भीड़ को देखकर कहा कि आप सबने आज अपने ही रिकॉर्ड तोड़ दिए, इतनी बड़ी संख्या में कांशीराम जी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
कांग्रेस और सपा पर बरसीं मायावती
मायावती ने रैली में कांग्रेस और सपा दोनों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांशीराम के निधन पर न तो केंद्र की कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय शोक घोषित किया, और न ही यूपी की सपा सरकार ने राजकीय शोक। मायावती ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने उनकी छवि खराब करने के लिए झूठे मुकदमों में फंसाया, लेकिन अदालत से उन्हें न्याय मिला। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस संविधान की कॉपी लेकर नौटंकी कर रही है, जबकि डॉ. आंबेडकर को भारत रत्न से भी वंचित रखा गया।”
उन्होंने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने में भी उसे कोई दिलचस्पी नहीं थी, यह रिपोर्ट बसपा के दबाव और प्रयासों से वी.पी. सिंह सरकार में लागू हो सकी। मायावती ने बीजेपी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि घोषणाएं और शिलान्यास तो खूब होते हैं, लेकिन जनता को उसका असली लाभ नहीं मिलता, सब कुछ कागज़ों तक सीमित रह जाता है। उन्होंने कहा कि जब बसपा सत्ता में आई तो कानून-व्यवस्था को सुधारने का काम किया, जिसे लोग आज भी याद करते हैं। जो उस समय की जरूरत थी।
“दलित वोट बांटने की साजिश कर रहे हैं विपक्षी दल”
मायावती ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये पार्टियां दलित वोट बैंक को तोड़ने की साजिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हमने सरकार में रहते हुए हर जाति को रोजगार के अवसर दिए, लेकिन मौजूदा सरकार फ्री राशन देकर लोगों को गुलाम बना रही है। मायावती ने कहा कि “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत पर चलने वाली बसपा को केंद्र और राज्यों की सत्ता में लाना जरूरी है। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे षड्यंत्र रचकर बसपा को सत्ता से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद, बसपा की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सभी दलों ने अंदरूनी तौर पर एकजुट होकर पार्टी को दोबारा सत्ता में आने से रोक दिया। मायावती ने आरोप लगाया कि विरोधियों ने दलित समाज में से ही बिकाऊ लोगों के ज़रिए कई संगठन खड़े कर दिए, ताकि वोटों का बंटवारा किया जा सके। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इन साजिशों से सावधान रहें और आगामी बिहार, अन्य राज्यों और आम चुनावों में बसपा को मजबूत करें।
आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा-सपा पर तीखा हमला
बसपा प्रमुख मायावती ने आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा और सपा दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि SC-ST और पिछड़े वर्गों को आरक्षण का लाभ सही रूप में नहीं मिल रहा, क्योंकि जातिवादी सरकारों ने कोर्ट में आरक्षण की सही पैरवी नहीं की। उन्होंने भाजपा पर प्रमोशन में आरक्षण बिल को संसद में लटकाने का आरोप लगाया, तो वहीं सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा को इस बिल से इतनी नफरत थी कि उन्होंने बिल की कॉपी ही फाड़ दी थी।
मायावती ने 2027 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का आह्वान किया और कहा कि बीजेपी शासन में मुस्लिम और अन्य धर्मों के लोगों का ना तो उत्थान हुआ, न ही उनकी जान-माल सुरक्षित रही। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को भी दरकिनार कर दिया गया, और केंद्र व राज्य सरकारों के अधिकांश काम केवल फाइलों तक सीमित रह गए हैं। मायावती ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि ये लुभावने वादे कर सत्ता में आते हैं लेकिन वादों को लागू नहीं करते, और नाकामी छुपाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। उन्होंने अंत में चेतावनी दी कि सत्ताधारी और विपक्षी दल बाबा साहब के संविधान को बदलकर जातिवादी व्यवस्था फिर से लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बसपा ऐसा कभी नहीं होने देगी, चाहे इसके लिए कितना भी संघर्ष क्यों न करना पड़े।
2027 चुनाव के लिए मायावती का मंत्र
बसपा प्रमुख मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि सभी वर्गों को बसपा के झंडे तले एकजुट होना होगा, क्योंकि यही एकमात्र पार्टी है जो बाबा साहब के संविधान को सुरक्षित रखते हुए दबे-कुचले वर्गों को मजबूत बना सकती है। मायावती ने कहा कि बसपा की सरकार के समय जनता ने इसका उदाहरण चार बार देखा है। अब एक बार फिर बसपा को सत्ता में लाना जरूरी है। उन्होंने 2007 के चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि उसी रणनीति पर काम करना होगा, छोटी-छोटी बैठकों के जरिए सर्वजन को पार्टी की नीतियों और सरकार की उपलब्धियों से जोड़ना होगा।
बसपा का दावा : लखनऊ रैली में जुटे पांच लाख कार्यकर्ता
बसपा ने दावा किया है कि लखनऊ में आयोजित रैली में प्रदेशभर से पांच लाख से ज्यादा कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए पार्टी ने विशेष रणनीति और तैयारियों के साथ पूरी ताकत झोंक दी है। मायावती इस रैली में करीब तीन घंटे तक मंच पर मौजूद रहेंगी और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगी। मंच पर कुल सात कुर्सियां लगाई गई हैं, जिनमें मायावती के अलावा उनके भाई आनंद कुमार, भतीजे आकाश आनंद और वरिष्ठ नेता सतीशचंद्र मिश्र भी शामिल होंगे। कार्यक्रम की शुरुआत थोड़ी देर में होनी है। रैली को सफल बनाने के लिए पार्टी ने चारबाग रेलवे स्टेशन पर पहली बार कार्यकर्ता सहायता शिविर भी लगाया है, ताकि दूर-दराज से आए कार्यकर्ताओं को सुविधा मिल सके।
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