नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मध्य प्रदेश के धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। बुधवार (5 नवंबर) की रात सेक्टर 3 स्थित शिवम इंडस्ट्रीज (लुब्रिकेंट ऑयल फैक्ट्री) के परिसर में खड़े एक तेल टैंकर में भीषण आग लगने से दो कर्मचारियों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा रात करीब साढ़े दस बजे हुआ, जिसने इलाके में हड़कंप मचा दिया।अधिकारियों ने गुरुवार को मृतकों की पहचान और हादसे से जुड़ी जानकारी दी।
भीषणता ऐसी कि 4 घंटे तक चली मशक्कत
पीथमपुर के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) राहुल गुप्ता ने पुष्टि की कि आग इतनी भयानक थी कि दो कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए।मृतकों की पहचान नीरज (23) और कल्पेश (35) के रूप में हुई है।हादसे में टैंकर चालक मनोज झा (55) (निवासी बिलासपुर, छत्तीसगढ़) और फायर फाइटर दिलीप सिंह यादव भी झुलस गए हैं, जिनका इलाज इंदौर में चल रहा है।
हादसे की सूचना मिलते ही पीथमपुर थाना प्रभारी सुनील शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एसपी मयंक अवस्थी, एएसपी पारुल बेलापुरकर, एसडीएम राहुल गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
टैंकर में लगी आग, इलाके को कराया गया खाली
बताया गया कि आग लुब्रिकेंट ऑयल से भरे एक टैंकर में अज्ञात कारणों से लगी। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि, आसपास के रास्तों को बंद करना पड़ा।फैक्ट्री के आसपास के इलाके को एहतियात के तौर पर खाली कराया गया।पास खड़े एक और टैंकर को तुरंत दूर कराया गया।इंदौर और पीथमपुर से आई चार फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
मुआवजा और जाँच पर प्रशासन का रुख
अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है और मामले की जाँच जारी है। मुआवजे की घोषणा को लेकर प्रशासन ने फिलहाल आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
मुआवजे की प्रक्रिया
एसडीएम राहुल गुप्ता ने बताया कि फिलहाल जाँच पर ध्यान केंद्रित है। आमतौर पर, औद्योगिक सुरक्षा नियमों के तहत, फैक्ट्री प्रबंधन की ज़िम्मेदारी है कि वह मृतकों के परिवारों को मुआवजा (ESIC नियमों के तहत) दे और घायलों का इलाज कराए।
सरकारी सहायता
जिलाधिकारी द्वारा जल्द ही मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर सरकारी अनुग्रह राशि (Ex-gratia) की घोषणा की जा सकती है, और श्रम विभाग द्वारा फैक्ट्री पर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
धार के इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उद्योगों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। दो परिवारों की खुशियाँ राख में बदल गईं, जबकि प्रशासन अब जांच और जवाबदेही तय करने में जुटा है।





