नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र में एक बार फिर आरक्षण का मुद्दा गर्मा गया है। मंत्री पंकजा मुंडे ने दशहरा रैली के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि मराठा समुदाय को आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन यह OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) की हिस्सेदारी से नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि OBC समुदाय पहले ही कई संघर्षों और गरीबी का सामना कर रहा है, इसलिए उनकी हिस्सेदारी से आरक्षण नहीं देना उचित होगा। पंकजा मुंडे ने बीड जिले के सावरगांव घाट में रैली को संबोधित करते हुए यह भी अपील की कि जातिवाद के इस दानव को समाज से पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए।
पंकजा मुंडे का बयान
पंकजा मुंडे ने अपने भाषण में कहा कि उनके पिता गोपीनाथ मुंडे भी मराठा आरक्षण के पक्षधर थे और वह खुद भी पूरी तरह इस मुद्दे का समर्थन करती हैं। उन्होंने कहा कि “हमारा मुख्य उद्देश्य मराठा आरक्षण है, लेकिन यह किसी भी हालत में OBC की हिस्सेदारी से कम नहीं होना चाहिए। आज OBC समाज पहले ही कई कठिनाइयों का सामना कर रहा है, भूखा मर रहा है और मुझे यह देख कर नींद नहीं आती।” मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंकजा मुंडे ने रैली में मौजूद लोगों से अपील की कि मराठा आरक्षण सिर्फ उनका हक है और इसे किसी और समुदाय की हिस्सेदारी से छीनना गलत होगा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने 2 सितंबर को हैदराबाद गजेटियर को लागू करने के लिए शासनादेश जारी किया था, जिसके तहत मराठा समुदाय के योग्य सदस्य कुनबी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। प्रमाण पत्र मिलने के बाद वे OBC श्रेणी में आरक्षण का दावा कर सकते हैं। इस पर पंकजा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि OBC समाज पहले ही संघर्ष कर रहा है और इसे और नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, और आरक्षण का लाभ हर योग्य समुदाय तक सही तरीके से पहुंचे।
जातिवाद है समाज के लिए सबसे बड़ा राक्षस- पंकजा मुंडे
अपने भाषण में पंकजा मुंडे ने जातिवाद को समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया और इसे एक ऐसा राक्षस करार दिया जो आज लोगों के मन-मस्तिष्क में जन्म ले रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में देवी दुर्गा और रक्तबीज राक्षस की कथा का जिक्र करते हुए कहा कि ठीक उसी तरह जैसे रक्तबीज के हर कतरे से नया राक्षस पैदा होता था, वैसे ही जातिवाद भी समाज में बार-बार नए रूप में उभर रहा है। मुंडे ने प्रार्थना की कि देवी दुर्गा उन्हें इतनी शक्ति दें कि वे जातिवाद के इस दानव का अंत कर सकें और समाज में समानता और न्याय का मार्ग प्रशस्त किया जा सके। उन्होंने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अपने विचारों और कर्मों के जरिए जातिवाद को खत्म करने में भूमिका निभाएं और सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हों।





