नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मणिपुर में हुई हिंसा ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। वहीं मणिपुर में हिंसा थमने के बाद भी वहां के हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दरअसल मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को हटाने के लिए विपक्ष काफी समय से आवाज उठा रहा था। वहीं अब मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की पार्टी के 7 विधायकों ने भी उनके खिलाफ हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए एक आयोग गठित करने की मांग की है।
हिंसा की घटना को लेकर कुल 10 कूकी विधायकों ने जांच की मांग की है
इस हिंसा की घटना को लेकर कुल 10 कूकी विधायकों ने जांच की मांग की है, जिसमे से 7 विधायक मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की पार्टी बीजेपी से ही हैं। इन सभी ने मांग की है कि अगर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह इस मामले में दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए।
सीएम एन. बीरेन सिंह ने कूकी समुदाय के नरसंहार को रोका नहीं
इन सभी 10 कूकी विधायकों ने मिलकर बयान दिया है कि मणिपुर हिंसा में सीएम बीरेन सिंह ने कूकी समुदाय के नरसंहार को रोका नहीं, बल्कि उन्होंने मैतेई समुदाय के उपद्रवी तत्वों को ऐसा करने के लिए छूट दे रखी थी। बता दें कि मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह खुद मैतेई समुदाय से आते हैं। इन सभी 10 कूकी विधायकों ने मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह पर आरोप लगाया है कि उनके रवैये के कारण ही मैतेई समुदाय के उपद्रवी तत्वों को कूकी समुदाय के नरसंहार करने के लिए छूट दी गई थी।
उनका दोष साबित हो जाने पर उनके खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए
वहीं इन सभी 10 कूकी विधायकों ने यह भी कहा है कि जब गृह मंत्री अमित शाह मणिपुर आए थे तो उन्होंने मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को फटकार लगाई थी और जनता पर बमों का प्रयोग न करने को कहा था। लेकिन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह के जाने के बाद भी जनता पर उसी तरह बम बरसने दिए। इन सभी 10 कूकी विधायकों ने मणिपुर हिंसा को लेकर सीएम बीरेन सिंह के खिलाफ जांच के लिए एक आयोग गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि उनका दोष साबित हो जाने पर उनके खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए।




