नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध और बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा संकट की चर्चा तेज हो गई है। ऐसे माहौल में भारत में भी रसोई गैस (LPG) की कमी को लेकर अफवाहें फैलने लगी हैं। 140 करोड़ की आबादी वाले देश में जब बात किचन के ईंधन की हो, तो लोगों का चिंतित होना स्वाभाविक है। हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में गैस की कोई भौतिक कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
देश में गैस कनेक्शनों का विशाल नेटवर्क
भारत में घरेलू एलपीजी कनेक्शनों की संख्या अब 33 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। अगर इस आंकड़े को समझें तो देश के अधिकतर शहरी और मध्यमवर्गीय परिवारों के पास डबल सिलेंडर कनेक्शन (DBC) होता है। इस हिसाब से देश में कुल एलपीजी सिलेंडरों की संख्या करीब 66 करोड़ से अधिक बैठती है। इतनी बड़ी संख्या बताती है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत का गैस वितरण नेटवर्क काफी मजबूत हुआ है और देश के लगभग हर हिस्से तक इसकी पहुंच बन चुकी है।
एक दशक में दोगुनी हुई गैस की पहुंच
अगर साल 2014 के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस समय देश में करीब 14.5 करोड़ LPG कनेक्शन ही थे। पिछले 10–12 सालों में इसमें जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और यह संख्या बढ़कर 33 करोड़ के पार पहुंच गई है। इस विस्तार का बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को जाता है। इस योजना के तहत अब तक करीब 10.4 करोड़ गरीब और ग्रामीण परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन दिया गया है। इससे न केवल महिलाओं को धुएं से राहत मिली है, बल्कि गांवों तक गैस वितरण नेटवर्क भी पहुंचा है।
PNG: अब पाइप से सीधे घर तक गैस
सिलेंडर के अलावा अब शहरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल करीब 1.5 करोड़ घरों में पाइपलाइन के जरिए गैस की सप्लाई हो रही है। यह सुविधा अभी मुख्य रूप से महानगरों और बड़े शहरों में उपलब्ध है। PNG को सिलेंडर के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है क्योंकि इसमें बार-बार गैस बुकिंग या रिफिलिंग की जरूरत नहीं पड़ती।
होटल और उद्योगों में भी गैस की बड़ी खपत
रसोई गैस का इस्तेमाल सिर्फ घरों में ही नहीं बल्कि होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है। आंकड़ों के अनुसार देश में 45 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट पाइप गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं वहीं 20 हजार से ज्यादा उद्योग भी गैस पर निर्भर हैं इसके अलावा कमर्शियल गैस सिलेंडरों की संख्या भी करोड़ों में है, जो छोटे व्यापारियों और दुकानों की जरूरत पूरी करते हैं। वैश्विक तनाव के कारण जब भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए चुनौती बढ़ जाती है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व और गैस कंपनियों के पास पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi भी पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ लगातार बैठकें कर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर आम लोगों पर कम से कम पड़े।




