नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी को देश का नया थल सेना सेना प्रमुख बनाया गया है। उनको मौजूदा सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे की जगह भारतीय थल सेना की कमान दी गई है। जनरल मनोज पांडे का कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है। रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले उनका कार्यकाल एक महीने के लिए बढ़ाया गया था। अब सरकार ने उप सेना प्रमुख के रूप में काम कर रहे लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी को 30 जून से अगले सेना प्रमुख के रूप में नियुक्त कर दिया है।
कौन है नए सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी?
नए सेना प्रमुख द्विवेदी को चीन और पाकिस्तान बॉर्डर पर ऑपरेशन के लिए जाना जाता है। वे डिफेंस पर मास्टर ऑफ फिलॉसफी (M Phil) और स्ट्रैटजिक और मिलिटरी साइंस में दो मास्टर डिग्री होल्डर हैं। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने फरवरी 2024 में उप सेनाध्यक्ष का पद संभाला था। लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी का जन्म 1 जुलाई 1964 को मध्य प्रदेश के रीवा में हुआ था। द्विवेदी अपनी शुरुआती पढ़ाई रीवा के सैनिक स्कूल से की से की है। इसके बाद वे नेशनल डिफेंस कॉलेज और यूएस आर्मी वॉर कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और आर्मी वॉर कॉलेज, महू में भी पढ़ाई पूरी की है।
30 जून को रिटायर होने वाले थे जनरल द्विवेदी
लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी सेना के सबसे सिनियर अफसर हैं। उनके बाद वरिष्ठता के क्रम में दक्षिणी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह का नाम आता है। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी और लेफ्टिनेंट जनरल सिंह, दोनों एक ही बैच के अधिकारी है और दोनों 30 जून को रिटायर होने वाले थे। जनरल मनोज पांडे को एक महीने का सर्विस एक्टेंशन दिए जाने से ऐसी अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी को आर्मी चीफ पोस्ट के लिए नजरअंदाज किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने इन अटकलों को गलत साबित करते हुए परंपरा अनुसार सबसे सीनियर अधिकारी को सेना की कमान दे दी। जुलाई 1964 को जन्में जनरल द्विवेदी आर्मी चीफ बनने के बाद अब 62 साल की उम्र तक देश को अपनी सेवा दे सकते हैं।
जनरल द्विवेदी के पास लगभग 40 वर्षों का लंबा सेवा अनुभाव
लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी को परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित हो चुका हैं। जनरल द्विवेदी ने लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर में अपनी सेवाएं दी हैं। जनरल द्विवेदी के पास लगभग 40 वर्षों का लंबा सेवा अनुभाव है। उन्होंने विभिन्न कमांड, स्टाफ, इंस्ट्रक्शनल और विदेशी नियुक्तियों में कार्य किया है। जनरल द्विवेदी के पास चीन सीमा के साथ-साथ पाकिस्तान की सीमा पर भी संचालन का बड़ा अनुभव है। लेफ्टिनेंट जनरल द्विवेदी ने अपने शानदार करियर के दौरान देश के कोने-कोने में चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनल एनवायरनमेंट में कमान संभाल चुके है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे देश के तमाम जटिल सीमा मुद्दे सुलझाने के लिए सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं, और भारतीय सेना की सबसे बड़ी कमान के आधुनिकीकरण में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा है।
अन्य खबरों के लिए क्लिक करें- https://www.raftaar.in/






