नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। शनिवार 2 नवंबर को सेना ने घाटी में ऑपरेशन चलाया था जिसमें लश्कर-ए-तैयबा का सरगना उस्मान मारा गया। हालांकि इस मुठभेड़ में सबसे अहम भूमिका सेना के अलावा बिस्कुट ने निभाई। आतंकी उस्मान घाटी में पिछले 8 सालों से अपने आतंक का कारोबार चला रहा था। सेना ने प्राप्त जानकारी के आधार पर शनिवार सुबह खान्यर इलाके की घेराबंदी की और 9 घंटे की प्लानिंग को सफल कर दिया। इस ऑपरेशन की सफलता में आवारा कुत्तों से लेकर बिस्कुट ने सबसे अहम भूमिका निभाई।
कैसे बिस्कुट बना उस्मान की मौत की वजह
शनिवार की सुबह ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए जैसे ही सेना खान्यर इलाके में पहुंची वैसे ही सबसे बड़ी समस्या आवारा कुत्तों की सामने आई। हालांकि सेना ने बिस्कुट के जरिए इसका हल निकाल लिया। दरअसल, आवार कुत्ते ऑपरेशन के दौरान भौंकते तो आतंकी सचेत हो जाते, लिहाजा सेना ने आवारा कु्त्तों को शांत करने के लिए बिस्कुट खिला दिए जिससे ऑपरेशन के दौरान कोई बाधा आड़े न आए। इसी रणनीति का इस्तेमाल करते हुए सेना आतंकी उस्मान के करीब पहुंच गई और उसे खबर तक नहीं हुई।
जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ रहे हैं आतंकी हमले
इस हमले में वार-पलटवार में 4 सुरक्षकर्मी घायल हो गए थे जिनके ठीक होने की कामना करते हुए सूबे के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला ने इस हमले को दुखद बताया। उन्होंने घाटी में लगातार बढ़ रही घटनाओं को लेकर भी दुख जताया। जम्मू कश्मीर में यह पिछले 18 दिनों में 9वां हमला था। हमले की शुरुआत 16 अक्टूबर से हुई थी जब शोपियां में आतंकियो ने गैर स्थानीय युवक को गोली मार दी थी। इसके बाद 20 और 24 अक्टूबर को भी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया गया। 1,2 और 3 नवंबर को भी 3 अलग अलग जगहों पर एनकाउंटर हुए।




