नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भारत से फरार चल रहे कारोबारी ललित मोदी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। भारतीय एजेंसियों से बचने के लिए उन्होंने वनुआतु की नागरिकता हासिल की थी, लेकिन अब वहां की सरकार ने भी उनके खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। वनुआतु के प्रधानमंत्री जोथम नापत ने नागरिकता आयोग को निर्देश दिया है कि ललित मोदी को दिया गया पासपोर्ट तुरंत रद्द कर दिया जाए।
वनुआतु सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हुए खुलासों के बाद यह कदम उठाया गया है। हालांकि, ज्यादा जानकारी अब तक साझा नहीं की गई है। दावा किया जा रहा है कि वनुआतु सरकार को बाद में पता चला कि ललित मोदी भारत में कई आर्थिक अपराधों के मामले में भगोड़ा घोषित किया गया है।
न्यूजीलैंड में भारतीय उच्चायुक्त की अहम भूमिका
रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यूजीलैंड में भारत की उच्चायुक्त नीता भूषण ने अन्य द्वीपीय देशों के साथ मिलकर ललित मोदी का वनुआतु पासपोर्ट रद्द कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस फैसले के बाद अब ललित मोदी के लिए सुरक्षित ठिकाने की तलाश करना मुश्किल हो सकता है।
ललित मोदी ने भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करने के लिए किया था आवेदन
ललित मोदी ने 7 मार्च को अपना भारतीय पासपोर्ट वापस करने के लिए आवेदन दिया था। विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की थी। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “उन्होंने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में अपना पासपोर्ट जमा करने के लिए आवेदन किया है। इसकी जांच मौजूदा नियमों के तहत की जाएगी।
ललित मोदी पर क्या हैं आरोप?
ललित मोदी 2010 से भारत छोड़कर लंदन में रह रहे हैं। उनके खिलाफ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष रहते हुए वित्तीय अनियमितताओं, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 (फेमा) के उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं। वनुआतु सरकार के इस फैसले के बाद ललित मोदी के लिए कानूनी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। भारत सरकार लगातार उनके प्रत्यर्पण की कोशिशों में जुटी हुई है। अब देखना होगा कि वनुआतु का यह कदम उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को कितना आसान बनाता है।





