नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। कुवैत की एक बिल्डिंग में आग लगने से 50 से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई। इसमें 43 मजदूर भारतीय थे। ये सभी मजदूर कफाला सिस्टम से कुवैत में मजदूरी करने गए थे। जिसके बाद लोग खाड़ी देशों के कफाला सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस कफाला सिस्टम की वजह से खाड़ी देशों में जाने वाले मजदूरों की जिंदगी बदतर हो गई है।
क्या है कफाला सिस्टम?
खाड़ी देशों में मजदूर कफाला सिस्टम के माध्यम से मजदूरी करने जाते हैं। कफाला सिस्टम मालिक को मजदूरों पर काफी अधिकार देता है। जिसकी वजह से मजदूर अपने मालिक का गुलाम बन जात है। इसमें जॉब देने वाले व्यक्ति को कफील कहा जाता है। कफीलों को खाड़ी देशों की सरकार प्रायोजन परमिट का अधिकार देती है। इसके द्वारा मालिक दूसरे देशों से मजदरों को बुलाकर अपनी फैक्ट्री में काम करा सकता है। ये सिस्टम उस देश के मजदूरों पर लागू नहीं होता। इस कफाला सिस्टम में मालिक अपने मजदूरों को खाने, रहने और आने-जाने का खर्च देता है। कफाला सिस्टम जॉब देने वाले व्यक्ति को अपने मजदूरों पर इतना अधिक अधिकार दे देता है कि मालिक अपने मजदूरों को लगभग गुलाम बना देता है।
कफाला की वजह से मजदूरों के बदतर हैं हालात
कफाला सिस्टम मजदूरों के लिए एक अभिशाप माना जाता है, क्योंकि इसमें काम के घंटे बहुत ज्यादा होते हैं और मजदूरों की सैलरी भी तय नहीं होती। साथ ही मजदूरों को हफ्ते में किसी भी दिन छुट्टी नहीं दी जाती। कफाला सिस्टम खाड़ी देशों के लिए काफी फायदे का सौदा माना जाता है। इसकी मदद से खाड़ी देशों के बड़े-बड़े फैक्ट्रियों के मालिक कम खर्च करके अधिक पैसे बना पाते हैं। जिसकी वजह से उत्पादन लागत घट जाती है।
विदेशों में रहते लोगों ने कुवैत को कहा है बेहद खराब देश
साल 2022 में जारी एक रिपोर्ट में विदेशों में रहते लोगों ने कुवैत को 52 देशों की लिस्ट में सबसे नीचे रखा है। लोगों ने कुवैत के लोगों पर विदेशों से आने वाले लोगों को दोयम दर्जे का मानने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही यहां के वर्क कल्चर को लेकर लोगों में काफी असंतोष था। लोगों का कहना था कि इस देश में मजदूरों की हालत जानवरों से भी बदतर है।
कुवैत में हर साल मर रहे हजारों भारतीय मजदूर
एक आंकड़े के अनुसार पिछले 2 सालों में कुवैत में 1400 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। कुवैत में स्थित भारतीय दूतावास को 2021-23 के बीच भारतीय मजदूरों की 16 हजार से ज्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं। जिसमें वो समय पर सैलरी नहीं मिलने और शोषण करने का आरोप लगाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के द्वारा जारी जानकारी में बताया गया है कि साल 2022 से 2023 के बीच कुवैत में 731 भारतीय मजदूरों की मौत हो चुकी है।
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