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Wednesday, April 1, 2026
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राजनीति में पिता-पुत्र की वो जोड़ी जो कई बार जुदा हुई, जानिए, अनिल एंटनी, जयंत से लेकर तेजप्रताप तक के किस्से

राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को आरजेडी से 6 साल के लिए निकाल दिया था।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय राजनीति पिता और पुत्र की राहें जुदा होने का कई बार गवाह बन चुकी है। ऐसा ही बीते कुछ दिनों से राष्ट्रीय जनता दल यानी राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के साथ हुआ। इस दिशा में उनके नई पार्टी बनाने की अटकलें तब और तेज हो गई है अब वहीं तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर एक नया पेज ‘टीम तेज प्रताप यादव’ लॉन्च किया। जिसमें उन्होंने अपने समर्थकों से इस पेज को फॉलो करने की अपील भी की है। आज इस कड़ी में जानेगें भारतीय राजनीति के इतिहास में पिता और पुत्र की राजनीतिक जुदाई की कहानियों के बारे में ।

तेज प्रताप यादव और लालू के किस्से

जैसे,जैसे बिहार चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे ही सभी पार्टी अपनी कमर कसती नजर आ रही हैं। पिछले दिनों लालू प्रसाद यादव ने पार्टी और परिवार से बाहर निकालने की घोषणा की गई थी। तेज प्रताप यादव को वर्ष 2017 में भी एक दिन के लिए राजद पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। पार्टी से छह साल के निष्कासन की घोषणा के बाद से वह कभी पिता और भाई को लेकर भावुक बयान देते हैं तो कभी अपने प्रशंसकों से घिरे और कभी तो खुद की तारीफ में गाना गाने वालों का ​वीडियो शेयर करते हुए भी नजर आते है। 

एके एंटनी का बेटे अनिल एंटनी

बता दें, एके एंटनी ने साल 1970 में कांग्रेस की टिकट पर केरल विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई। वह केरल के 1977, 1995 और 2001 में तीन बार मुख्यमंत्री भी बने। साल 2022 में राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त होने के बाद, संसदीय राजनीति छोड़कर अपने गृहराज्य केरल चले गए। वह साल 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान अचानक मीडिया की सुर्खियों में तब आए थे, जब उन्होंने अपने बेटे अनिल एंटनी को चुनाव हारने की बद्दुआएं दे दी थी। उन्होंने यहा तक कह दिया था कि,बेटे ने बीजेपी में शामिल होकर गलती की है। कांग्रेस ही उनका धर्म है। दरअसल, एके एंटनी के बेटे ने साल 2023 में गुजरात दंगों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की डॉक्यूमेंट्री पर विवाद के बाद कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। और बीजेपी में शामिल हो गए जिसके बाद एके एंटनी ने बीजेपी की टिकट से पथानामथिट्टा लोकसभा से बेटे अनिल की बजाय कांग्रेस उम्मीदवार एंटो एंटनी के जीतने की कामना की थी।

मेनका और वरुण गांधी ने 2004 में थामा था बीजेपी का दामन

अब वहीं बात करें राजनीतिक में बेटे मां की राजनीतिक दूरियों के बारे में तो, भारत की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी कांग्रेस के फायरब्रांड नेता थे। तब यह माना जा रहा था कि वही कांग्रेस के अगले सूत्रधार साबित होंगे। लेकिन राजनीति और भविष्य के गर्भ में क्या छिपा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। ऐसी ही एक अनहोनी गांधी-नेहरू परिवार में हुई और उसने भारतीय राजनीति में एक परिवार की राहें अलग कर दी। कांग्रेस की हार के बाद संजय गांधी और मेनका गांधी ने बिखर रही पार्टी को एकजुट किया और 1980 में पार्टी को जीत दिलाई। लेकिन इस जीत के बाद इंदिरा गांधी और मेनका के बीच दूरियां बढ़ने लगी। और फिर एक दिन ऐसा आया जब संजय गांधी की 23 जून 1980 को एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई।

इसके बाद, मेनका को इंदिरा गांधी का घर छोड़ना पड़ा । मेनका की उम्र उस समय सिर्फ 23 साल थी। वरुण भी बहुत छोटे थे। मेनका को खुद को स्थापित करने के लिए काफी जदोजहद् करनी पड़ी। राजीव गांधी के खिलाफ 1984 में राष्ट्रीय संजय मंच पार्टी से मेनका ने चुनाव लड़ा। लेकिन यहां मेनका को करारी हार मिली। फिर मेनका पहली बार 1989 में चुनाव जीतीं। उसके बाद तो 6 बार सांसद चुनी गई। साल 2004 में बेटे वरुण के साथ बीजेपी पार्टी में शामिल हो गई। 

जनार्दन द्विवेदी के बेटे समीर भी BJP में हो गए थे शामिल

साल 2020 में दिल्ली विधानसभा का चुनाव चरम पर था तब मतदान की तारीख से ठीक 4 दिन पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता जनार्दन द्विवेदी के बेटे समीर ने बीजेपी में शामिल होकर जोरदार झटका दिया। समीर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि मैंने उनका काम देखकर भाजपा में आने का फैसला किया है। हालांकि, इससे पहले जर्नादन द्विवेदी भी पीएम मोदी की जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद तारीफ कर चुके थे। लेकिन, उन्होनें ये भी कहा था कि, मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहियाजी हमेशा से अनुच्छेद 370 लागू रखने खिलाफ थे। इसके बाद जनार्दन द्विवेदी काफी समय तक कांग्रेस पार्टी के महासचिव रहे।

पिता यशवंत के पार्टी छोड़ने के बाद भी जयंत बने BJP से सांसद

पूर्व वित्तमंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा ने अटल सरकार में विदेश मंत्री रह चुके है, साल 2018 में उन्होंने पटना में बीजेपी से अलग होने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद वह अब तृणमूल कांग्रेस पार्टी के सांसद हैं। साल 2022 में विपक्ष ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार भी बनाया था। जिसके बाद राष्ट्रपति चुनाव से पहले उनके बेटे जयंत सिन्हा के बयान ने खूब सुर्खियां बटोरी। क्योंकि उन्होंने कहा था, कि मैं सांसद के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाऊंगा। जयंत बीजेपी पार्टी से दो बार सांसद रहे। साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया था। और वहीं इनके अलावा बिहार के कांग्रेसी सीएम भागवत झा के बेटे कीर्ति आजाद भी बीजेपी में शामिल हुए। हालांकि कीर्ति आजाद अब टीएमसी में हैं।

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