नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। गुरुवार को कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया। जिसमें कहा गया कि नीट परीक्षा प्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब छात्रों के मेडिकल शिक्षा के अवसरों को प्रभावित कर रही है। यह ना केवल स्कूली शिक्षा प्रणाली को अप्रभावी बना रही है बल्कि राज्य सरकार के द्वारा प्रबंधित मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को प्रवेश देने के अधिकार को भी छीन रहा है। इसलिए अनुरोध किया जाता है कि इस प्रणाली को खत्म कर दिया जाए।
कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री ने किया पेश
यह प्रस्ताव कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री शरण प्रकाश पाटिल ने पेश किया। जिसमें उन्होंने कहा कि कर्नाटक विधान परिषद ये आग्रह करती है कि केंद्र सरकार तुरंत राज्य को इस परीक्षा से छूट देना चाहिये और राज्य सरकार के द्वारा आयोजित कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के नंबरों के आधार पर छात्रों को मेडिकल एडमिशन देना चाहिये।
कर्नाटक सरकार ने बताया क्यों खत्म करना चाहते हैं नीट?
कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव में ये बताया गया है कि आखिर वो क्यों नीट को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि नीट की परीक्षा में बार-बार आ रही अनियमितता की शिकायतों को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है। प्रस्ताव में कर्नाटक की सरकार ने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 में भी संसोधन करना चाहिये। ताकि राष्ट्रीय स्तर पर नीट प्रणाली को ही खत्म कर दिया जा सके।
तमिलनाडु सरकार ने भी पारित किया था प्रस्ताव
बता दें कि, पिछले महीने ही DMK के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने भी नीट के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया था। जिसमें डीएमके सरकार ने केंद्र सरकार से कहा कि वो राज्य सरकारों को मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन की इजाजत दे। इस प्रस्ताव का मनिथानेया मक्कल काची, तमिल वेट्री कड़गम, भाकपा, मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम सहित कई पार्टियों ने भी समर्थन किया था।
डीएमके सांसद कनिमोझी ने दी थी जानकारी
इस संबंध में डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा था कि तमिलनाडु लगातार नीट को नकार रहा है। अब यह साबित हो चुका है कि नीट निष्पक्ष परीक्षा आयोजित नहीं करा रहा है इस वजह से हमारे छात्रों को काफी नुकसान हो रहा है। हम चाहते हैं कि नीट खत्म हो जाए। हमने विधानसभा में प्रस्ताव को पारित कर दिया है। अब सिर्फ राष्ट्रपति का साइन होना बाकी है।
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