नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले को लेकर राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उनपर केस चलाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। अब सिद्धारमैया केस में अपना नाम आने के बाद सोमवार को हाईकोर्ट पहुंचे और राज्यपाल के द्वारा उनपर केस चलाने के आदेश को चुनौती दी है। दरअसल यह केस मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) जमीन भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर राज्यपाल के द्वारा केस को लेकर दी गई अनुमति को रद्द करने की मांग की है। इस संबंध में न्यायमूर्ति हेमंत चंदनगौदर की पीठ सुनवाई करेगी।
कांग्रेस नेता रमेश बाबू ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
वहीं इस मामले को लेकर कांग्रेस के नेता रमेश बाबू ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ केस चलाने की राज्यपाल की मंजूरी को वापस लेने के निर्देश देने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा कर्नाटक कांग्रेस ने राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ राज्य में विरोध प्रदर्शन किया है।
क्या है मामला ?
दरअसल ये पूरा मामला 3 एकड़ 16 गुंटा जमीन से जुड़ा है। सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के पास मैसूर जिले के केसारे गांव में 3 एकड़ 16 गुंटा जमीन थी। ये जमीन पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन ने उन्हें गिफ्ट किया था। बाद में इस जमीन को MUDA ने अधिग्रहित कर लिया था। इस जमीन के बदले पार्वती को विजयनगर क्षेत्र में 38,283 वर्ग फीट के प्लॉट दे दिए गए। आरोप लगाया गया है कि विजयनगर के इस प्लॉट का बाजार मूल्य केसारे में उनकी मूल जमीन से बहुत ज्यादा है। हालांकि पार्वती को ये जमीन बीजेपी शासन के दौरान आवंटित की गई थी।
BJP की सरकार में दी गई जमीन
रिपोर्ट के अनुसार पार्वती की जमीन अधिग्रहण के बदले MUDA ने मुआवजे के तौर पर विजयनगर में जो जमीन दी थी वो पॉश इलाका है। इसका बाजार मूल्य मैसूर के केसारे गांव की तुलना में कहीं ज्यादा है। यहीं विवाद की जड़ है। हालांकि मुआवजे के तौर पर जमीन आवंटन की पूरी प्रक्रिया साल 2021 में पूरी हो गई थी। उस समय राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी।





