नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। चर्चित लैंबॉर्गिनी कार हादसे में आरोपी शिवम मिश्रा को एसीएमएम कोर्ट से राहत मिल गई है। अदालत ने पुलिस की 14 दिन की रिमांड अर्जी खारिज करते हुए उसे 20,000 रुपये के मुचलके और पर्सनल बॉन्ड पर जमानत दे दी। पुलिस जांच में यह सामने आया था कि हादसे के समय कार शिवम ही चला रहा था।
कोर्ट ने रिमांड की मांग क्यों ठुकराई?
शिवम मिश्रा के वकील नरेश चंद्र त्रिपाठी के मुताबिक, कोर्ट ने पुलिस की रिमांड अर्जी को खारिज कर दिया और आरोपी को जमानत दे दी। बचाव पक्ष ने दावा किया कि पुलिस ने सरकार के दबाव में आकर कार्रवाई की और गिरफ्तारी गलत तरीके से की गई। हादसे को लेकर सबसे बड़ा विवाद ड्राइवर को लेकर रहा। पुलिस का कहना है कि शिवम मिश्रा खुद ड्राइविंग सीट पर था, जबकि बचाव पक्ष ने डमी ड्राइवर मोहन लाल का नाम आगे रखा। हालांकि वायरल वीडियो में शिवम को ड्राइविंग सीट से बाहर निकलते देखा गया, जिससे पुलिस का दावा मजबूत हुआ।
पहचान छिपाने की कोशिश का आरोप
हादसे के बाद मौके पर कुछ बाउंसर भी नजर आए, जो कथित तौर पर कार की नंबर प्लेट हटाने या ढकने की कोशिश कर रहे थे। उनके पास वॉकी-टॉकी भी थे और वे लोगों को मौके से दूर कर रहे थे, इस घटना ने मामले को और विवादित बना दिया। डीसीपी अतुल श्रीवास्तव के मुताबिक, पांच टीमों ने छापेमारी कर शिवम मिश्रा को कानपुर से गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में पुलिस की लापरवाही के आरोप भी लगे थे, जिसके बाद ग्वालटोली थाना प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया। सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो की जांच के बाद ही गिरफ्तारी की गई।
फरारी के बाद पकड़ा गया आरोपी
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जब शिवम के घर पहुंची तो दरवाजा नहीं खोला गया और टीम को वापस लौटना पड़ा, बाद में गुरुवार को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जमानत मिल गई। फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।





