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Wednesday, April 8, 2026
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कांग्रेस की आलोचना करते हुए राज्यसभा में बोले नड्डा-ये बिरयानी खिलाते रहे, वहां से बम और गोलियां चलती रहीं

संसद के मानसून सत्र के दौरान 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर राज्यसभा में जोरदार बहस देखने को मिली। इस चर्चा के दौरान भाजपा के नेता जेपी नड्डा ने पहलगाम हमले को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। संसद के मानसून सत्र के दौरान Operation Sindoor को लेकर राज्यसभा में जोरदार बहस देखने को मिली। इस चर्चा के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने पहलगाम हमले को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह हमला कोई सामान्य बात नहीं है, यह किसी को बर्दाश्त नहीं होगा, जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग आज हमसे जवाब मांग रहे हैं, उन्होंने खुद अपने कार्यकाल में आतंकवाद पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया था।

 ‘बिरयानी खिलाते रहे, वहां से बम और गोलियां चलती रहीं’

जेपी नड्डा ने कांग्रेस की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, आप पाकिस्तान को मिठाई पर मिठाई खिलाते रहे, और वहां से बम और गोलियां चलती रहीं। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस शासन में कई भीषण आतंकी हमले हुए, लेकिन तब सरकार ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

 2005-06 के आतंकी हमलों का ज़िक्र

जेपी नड्डा ने अपने भाषण में कांग्रेस शासनकाल की तीन बड़ी आतंकी घटनाओं का ज़िक्र किया 2005 दिवाली से पहले दिल्ली सीरियल ब्लास्ट 67 लोगों की मौत, 200 घायल 2006 वाराणसी संकटमोचन मंदिर हमला 28 मारे गए, 100 घायल 2006 मुंबई लोकल ट्रेन धमाके 209 की मौत, 700 घायल उन्होंने बताया कि इन हमलों के बावजूद तत्कालीन सरकार ने कोई सख्त एक्शन नहीं लिया, केवल बैठकों का ढोंग किया गया।

आतंकवाद पर मोदी सरकार की तुलना

जेपी नड्डा ने आंकड़ों के साथ कहा कि 2004 से 2014 के बीच आतंकी हमलों में 1770 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2014 से 2024 के बीच ये संख्या घटकर 357 रह गई। उन्होंने इसे मोदी सरकार की सख्त नीति और निर्णायक नेतृत्व का नतीजा बताया। राज्यसभा में आरजेडी सांसद मनोज झा ने पीएम मोदी के लोकसभा बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आप संसद में भारत का नहीं, सरकार का पक्ष रख रहे थे। संसद तो भारत की है, इसमें पक्ष और विपक्ष दोनों भारत हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों और संसद के फर्क को लेकर सरकार की सोच पर भी सवाल उठाए। राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के बहाने एक बार फिर आतंकवाद बनाम राजनीति की रेखा खिंच गई। एक तरफ भाजपा ने कड़ी कार्रवाई और मजबूत नेतृत्व की बात की, तो दूसरी तरफ विपक्ष ने सरकार से उत्तरदायित्व और पारदर्शिता की मांग की। आने वाले समय में इस बहस का असर संसद से लेकर जनमानस तक दिख सकता है।

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