नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। 5 अगस्त 2019 को धारा 370 हटने के बाद यह पहला मौका होगा जब जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होंगे। चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर जम्मू कश्मीर में बड़ी हलचल देखी जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं हैं।
200 पुलिस अधिकारियों को तबादले के आदेश
राज्य सरकार ने चुनावों की चाक चौबंद सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगभग 200 सिविल और पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। 15 अगस्त की शाम से अभी तक 88 IAS,IPS और 33 IG से लेकर SSP रैंक तक के अधिकारियों का तबादला हो चुका है।
83 नहीं अब 90 सीटों पर होंगे चुनाव
जम्मू कश्मीर में आखिरी बार विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे, तब से लेकर अब तक जम्मू कश्मीर में बहुत कुछ बदल चुका है। 2014 विधानसभा चुनाव में 83 सीटें थी जबकि धारा 370 हटने और परिसीमन के बाद सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो गई है।
कश्मीरी पंडितों के लिए क्या बदला?
जम्मू कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों में 2 सीटें सिर्फ कश्मीरी पंडितों के नाम पर आरक्षित की गई हैं, हालांकि कश्मीरी पंडितों को कश्मीरी प्रवासी की संज्ञा दी गई है। जिस भी व्यक्ति ने 1 नवंबर 1989 के बाद जम्मू कश्मीर से पलायन किया होगा और उनका नाम रिलीफ कमीशन में रजिस्टर होगा, उन्हें कश्मीरी प्रवासी का दर्जा दिया जाएगा।
LG ही रहेंगे बॉस
गृह मंत्रालय ने 12 जुलाई को जम्मू कश्मीर के एलजी के अधिकारों में बड़ा बदलाव किया था, जिसमें एलजी के अधिकारों में बढ़ोतरी की गई। ट्रांसफर पोस्टिंग जैसे कई बड़े फैसले लेने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास न रहकर एलजी के पास ही होगा।
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