नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। भारत में रसोई गैस का मतलब आमतौर पर लाल रंग का LPG सिलेंडर होता है, जिसे खत्म होने पर बुक किया जाता है और फिर डिलीवरी बॉय घर तक पहुंचाता है। लेकिन अमेरिका में किचन गैस का सिस्टम काफी अलग है। वहां ज्यादातर जगहों पर सिलेंडर बदलने की बजाय बड़े गैस टैंकों को रिफिल किया जाता है। अमेरिका में LPG को आमतौर पर प्रोपेन (Propane) कहा जाता है और इसका इस्तेमाल खासतौर पर उन इलाकों में होता है जहां प्राकृतिक गैस की पाइपलाइन नहीं पहुंचती।
शहरों में पाइपलाइन गैस का इस्तेमाल
अमेरिका के बड़े शहरों में ज्यादातर घरों में प्राकृतिक गैस की पाइपलाइन सीधी घर तक पहुंचती है। इसलिए वहां भारत की तरह हर महीने सिलेंडर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। गैस लगातार पाइपलाइन के जरिए सप्लाई होती रहती है। अमेरिका के ग्रामीण इलाकों और उपनगरों में प्रोपेन गैस का इस्तेमाल होता है। यहां हर घर के बाहर एक बड़ा गैस टैंक लगाया जाता है। यह टैंक घर के आंगन या पिछवाड़े में जमीन के ऊपर या नीचे लगाया जाता है और इसकी क्षमता भारत के 14.2 किलो वाले सिलेंडर से कई गुना ज्यादा होती है।
सिलेंडर बदलने की बजाय टैंक रिफिल
अमेरिका में गैस खत्म होने पर सिलेंडर बदलने का सिस्टम नहीं होता। वहां गैस कंपनी का टैंकर ट्रक घर पर आता है और पाइप के जरिए बाहर लगे टैंक को रिफिल कर देता है। कई कंपनियां टैंक में सेंसर भी लगाती हैं। जैसे ही गैस का स्तर कम होता है, कंपनी को अपने आप सूचना मिल जाती है और डिलीवरी ट्रक आकर टैंक भर देता है। इस वजह से लोगों को गैस खत्म होने का इंतजार या बुकिंग करने की जरूरत नहीं पड़ती।
टैंक खरीदने या किराए पर लेने का विकल्प
अमेरिका में गैस टैंक को लेकर दो तरह की व्यवस्था होती है। मकान मालिक खुद टैंक खरीद सकता है या फिर गैस कंपनी से टैंक किराए पर ले सकता है अगर टैंक कंपनी का होता है, तो उसी कंपनी से गैस भरवानी होती है। यह सिस्टम लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित होता है। हालांकि बड़े टैंक कुकिंग और हीटिंग के लिए इस्तेमाल होते हैं, लेकिन अमेरिका में छोटे प्रोपेन सिलेंडर भी काफी लोकप्रिय हैं। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से बारबेक्यू ग्रिल, कैंपिंग और आउटडोर कुकिंग के लिए किया जाता है।
सुपरमार्केट और पेट्रोल पंप पर एक्सचेंज
अमेरिका में छोटे सिलेंडरों के लिए एक्सचेंज सिस्टम चलता है। लोग अपना खाली सिलेंडर लेकर सुपरमार्केट या पेट्रोल पंप पर जाते हैं और उसे भरे हुए सिलेंडर से बदल लेते हैं। भारत की तरह छोटे सिलेंडरों की घर-घर डिलीवरी वहां आम नहीं है। भारत और अमेरिका में रसोई गैस का सिस्टम पूरी तरह अलग है। भारत में लोग सिलेंडर बुक करके घर तक डिलीवरी लेते हैं, जबकि अमेरिका में बड़े टैंकों को ट्रक के जरिए रिफिल किया जाता है और कई जगह यह सिस्टम काफी हद तक ऑटोमेटेड भी है।




