नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारत और पाकिस्तान के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है और दोनों देश अब युद्ध विराम पर सहमत हो गए हैं। 7 मई से 10 मई तक भारतीय सेना ने पाकिस्तान की आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब दिया, न केवल उनके हमलों को बेअसर किया, बल्कि पाकिस्तान के अंदर उनके हवाई ठिकानों पर भी सीधे हमला किया। इससे पाकिस्तान को होश आया और वह युद्धविराम पर सहमत हो गया।
“उस समय सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी पार्टी दोनों महान थे”
1971 के युद्ध में भारत को जीत मिली। उस समय भारत पूर्वी पाकिस्तान को पश्चिमी पाकिस्तान से पूरी तरह अलग करके एक स्वतंत्र बांग्लादेश बनाने में सफल रहा। इन घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के विधायक रोहित पवार ने एक विस्तृत पोस्ट लिखा है। रोहित पवार ने पोस्ट में यह भी बताया कि उस समय की सत्ताधारी और विपक्षी दोनों पार्टियां महान थीं।
सोशल मीडिया एक्स पर सोमवार को शेयर की गई पोस्ट की शुरुआत में रोहित पवार ने लिखा, “1971 के युद्ध में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया और दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश नाम से एक नए देश को जन्म दिया। यह उसी समय की घटना है।”
1971 में क्या हुआ?
रोहित पवार ने इस पोस्ट में लिखा, “1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में स्वतंत्रता आंदोलन जोरों पर था। शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व वाली आवामी लीग ने पाकिस्तानी चुनावों में बहुमत हासिल किया। लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान के शासक वर्ग ने सत्ता सौंपने से इनकार कर दिया। इसके कारण पूर्वी पाकिस्तान में हिंसा और अत्याचार बढ़ गए और करीब 10 मिलियन शरणार्थी भारत आ गए।”
“इंदिरा गांधी की सशक्त भूमिका”
रोहित पवार ने कहा, “तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने पाकिस्तान की मदद के लिए बंगाल की खाड़ी में अपना सातवां बेड़ा भेजा था। यह भारत पर दबाव बनाने की कोशिश थी ताकि भारत युद्ध में हस्तक्षेप न करे। लेकिन इंदिरा गांधी ने इस दबाव के आगे झुके बिना कड़ा रुख अपनाया और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर से साफ कह दिया कि अगर अमेरिका ने पाकिस्तान को नहीं रोका तो भारत को कार्रवाई करनी पड़ेगी।”
रोहित पवार ने पोस्ट में बताया है, “इंदिरा गांधी ने सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ को पूरी आजादी दी और युद्ध की तैयारी करवाई। 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत पर हवाई हमले किए और भारत ने जवाब में युद्ध की घोषणा कर दी। सिर्फ़ 13 दिनों में भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में निर्णायक जीत हासिल कर ली और 16 दिसंबर 1971 को 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया।”
अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख किया
रोहित पवार ने तत्कालीन विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी की प्रशंसा करते हुए कहा “इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े होने और बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद ही युद्ध विराम की घोषणा की थी। क्योंकि वह इंदिरा गांधी थीं… आयरन लेडी! उस समय विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने भी उन्हें सम्मानपूर्वक ‘दुर्गा’ कहा था। यही कारण है कि इस मजबूत नेता इंदिरा गांधी के साहस, स्वाभिमान, देशभक्ति और नेतृत्व गुणों को आज भी याद किया जाता है।”




