नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। नीट यूजी और नेट की परीक्षा पेपर लीक होने की वजह से रद्द हो गई। इन दोनों परीक्षाओं का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने किया था। जिसके बाद से भारत में पेपर लीक को लेकर बवाल मचा हुआ है। लोग लगातार सरकार पर दोबारा नीट की परीक्षा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं। NEET और NET पेपर लीक के बाद एनटीए पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह से NTA के DG सुबोध कुमार सिंह को उनके पद से हटा दिया गया।
Modi 2.0 सरकार में हुआ था NTA का गठन
दरअसल NTA का गठन मोदी 2.0 सरकार में हुआ था। 2017 में वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में NTA की घोषणा की थी। उसके बाद इसे कैबिनेट ने भी पास कर दिया। एनटीए के गठन के बाद इसके पहले डायरेक्टर जनरल के रूप में विनीत जोशी को नियुक्त किया गया। विनीत जोशी 1992 बैच के मणिपुर कैडर के IAS अधिकारी हैं। इसके बाद 7 जुलाई 2018 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घोषणा की कि एनटीए JEE MAIN, नीट यूजी, नेट, कॉमन मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट और ग्रेजुएट फॉर्मेसी एप्टीट्यूड टेस्ट का आयोजन करेगा।
एनटीए गवर्निंग बॉडी के भरोसे ही सारी परीक्षाएं आयोजित करता है। ये परीक्षाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से आयोजित की जाती है। एनटीए सबकुछ आउटसोर्स करता है। पेपर बनाने के लिए एनटीए विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर्स को बुलाता है।
कैसे होती है परीक्षा
ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षा को लेकर एनटीए के द्वारा अलग-अलग पैटर्न अपनाता है। ऑफलाइन परीक्षा के लिए एनटीए अपने प्रश्न पत्र को पहले बैंक भेज देता है। इन बैंकों में सरकारी और प्राइवेट सभी तरह के बैंक शामिल हैं। परीक्षा से एक दिन पहले शाम को एनटीए से एक मैसेज आता है कि आपको इस बैंक से प्रश्न पत्र मिलेंगे। फिर सुबह 4 बजे बैंक की लोकेशन बदल दी जाती है।
कैसे होता है पेपर लीक
दरअसल जिस जगह पर नेटवर्क इश्यू हो या फिर बैंक में प्रश्न पत्र रखने के लिए जगह कम हो। वहां पेपर लीक करना आसान है। पेपर लीक प्रश्न पत्र ले जाने के दौरान ही हो जाता है। प्रश्न पत्र के बॉक्स सेंटर पर ले जाने के बाद ऑब्जर्वर, सेंटर कोऑर्डिनेटर, इन्विसिलेटर और दो परीक्षार्थियों की मौजूदगी में बॉक्स खुलता है। इस दौरान अगर सब लोग पहले से ही मैनेज हैं तो पेपर लीक हो जाता है।
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