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Friday, April 3, 2026
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अतिरिक्त वाणिज्यिक अदालतों की स्थापना के लिए दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने वाणिज्यिक विवादों के निपटारे में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त 42 वाणिज्यिक अदालतों (कमर्शियल कोर्ट्स) को मंजूरी देने की उसकी अधिसूचना को लागू करने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को दिल्ली सरकार और अन्य से जवाब मांगा। जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी करते हुए, जस्टिस विपिन सांघी और नवीन चावला की पीठ ने अदालत के बुनियादी ढांचे, न्यायिक अधिकारियों और अदालतों की उपलब्धता के संबंध में स्थिति रिपोर्ट मांगी और मामले को 5 जुलाई को आगे की सुनवाई के लिए निर्धारित कर दिया। राष्ट्रीय राजधानी में प्रस्तावित 42 अतिरिक्त वाणिज्यिक अदालतों की स्थापना की आवश्यकता पर जोर देते हुए, याचिकाकर्ता अधिवक्ता अमित साहनी ने कहा कि दिल्ली को वाणिज्यिक विवादों के निपटान को लेकर दुनिया की सर्वोत्तम प्रथा या एक्सरसाइज के लिए एक वाणिज्यिक विवाद का फैसला करने में 747 दिन लगते हैं, जबकि अन्य में यह आंकड़ा 164 दिन है। याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका में कहा कि मुंबई में औसतन केवल 182 दिन लगते हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, दिल्ली की अदालतों पर अधिक बोझ है। दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली जिला अदालतों में कार्यरत 22 वाणिज्यिक अदालतों में 26,959 मामले लंबित हैं। यह कहते हुए कि याचिका में शामिल मुद्दा बड़े जनहित में है, उन्होंने कहा कि अतिरिक्त 42 अदालतें, जैसा कि 22 मार्च, 2021 को दिल्ली सरकार द्वारा अनुमोदित और बाद में 13 अप्रैल, 2021 को अधिसूचित किया गया था, अभी तक आना बाकी है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यह न केवल दिल्ली में वाणिज्यिक अदालतों के बोझ को कम करेगा बल्कि वाणिज्यिक विवाद के मामलों में त्वरित न्याय भी सुनिश्चित करेगा। याचिका में कहा गया है कि समय-समय पर उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय द्वारा न्याय प्रदान करने में हुई देरी को संज्ञान में लिया गया है और देश की विभिन्न अदालतों में लंबित रिक्तियों की भर्ती के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। कम से कम वाणिज्यिक विवादों से संबंधित न्याय वितरण प्रणाली में तेजी लाने के लिए, वाणिज्यिक न्यायालयों, वाणिज्यिक प्रभाग और उच्च न्यायालयों के वाणिज्यिक अपीलीय प्रभाग अधिनियम, 2015 को सरकार द्वारा पारित किया गया है, जो वाणिज्यिक न्यायालयों के एक अलग सेट को स्थापित करने का प्रावधान करता है। जिला स्तर पर राज्य सरकारों द्वारा वाणिज्यिक विवादों से संबंधित मुकदमों और दावों के ट्रायल के लिए यह अदालतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। –आईएएनएस एकेके/एएनएम

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