नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय जनता पार्टी ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा को उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद तक टालने का फैसला किया है, जिसे अब यह कदम 2024 के बाद बदले राजनीतिक हालात में पार्टी के अंदरूनी ढांचे को संभलकर ढालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए फ्लोर मैनेजमेंट पर ध्यान दे रही है।
बता दे, बीजेपी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि, जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव 2024 के बाद समाप्त होना था, लेकिन अब पार्टी ने तय किया है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति सितंबर में होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद ही होगी। हालांकि, वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया है कि बिहार चुनाव से पहले इस पर फैसला हो सकता है। बता दें, पार्टी का संविधान कहता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी हो सकता है जब कम से कम 50 फीसदी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठन के चुनाव पूरे हो जाते हैं। अब बीच में ही उपराष्ट्रपति रहे जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद पार्टी का पूरा फोकस अब शिफ्ट हो गया है। रिपोर्ट्स की माने तो, राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही बीजेपी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेगी।
कब है उपराष्ट्रपति का चुनाव?
मॉनसून सेशन शुरू होते ही पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। जहां उन्होनें अपने स्वास्थ्य कारण का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद, चुनाव आयोग ने भी राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान भी कर दिया है। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होंगे और इसी दिन शाम तक परिणाम भी घोषित कर दिया जाएगा। यह भी तय माना जा रहा है, विपक्ष इंडिया गठबंधन का कोई साझा उम्मीदवार उतार सकता है।इससे पार्टी को यह सोचने का समय भी मिलेगा कि, नए अध्यक्ष में जातीय, क्षेत्रीय और पीढ़ीगत संतुलन कैसे बनाया जाए।
अब 21 अगस्त नामांकन दाखिल करने का आखिरी तारीख है। ऐसे में विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के पास उम्मीदवार घोषित करने के लिए काफी समय बाकी है। कुल मिलाकर, बीजेपी इस समय संसदीय संप्रभुता को संगठन की प्रभावशीलता से ऊपर रख रही है। जैसे-जैसे 2027 का राष्ट्रपति चुनाव भी नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे पार्टी अपने सभी कदम बहुत सोच-समझकर उठा रही है। उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद, न केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष बदला जाएगा बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी बदलाव की संभावना है। लोकसभा और राज्यसभा में कुल 782 सांसद हैं। NDA के पास लोकसभा में 293 तो इंडिया गठबंधन के पास 232 सांसद हैं। राज्यसभा में एनडीए के पास 133 और इंडिया गठबंधन के पास 107 सांसद हैं। ऐसे में सदन में एनडीए का पलड़ा भारी है।
मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद ही खत्म हो रहा था हालांकि, उनकी सफलताओं को देखते हुए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया। माना जा रहा है कि बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान के लिए उपराष्ट्रपति चुनाव पूरे होने का इंतजार कर रही है। जिसके बाद बिहार चुनाव से पहले बीजेपी को राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर देना है।फिलहाल, बीजेपी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए परिचालन प्रक्रियाओं में लगी हुई है। इस बार के चुनाव में लोकसभा में एनडीए के बहुमत का आंकड़ा कम हो गया था जिससे राज्यसभा में यह फाइट आसान नहीं माना जा सकती।
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य और लोकसभा के 543 सदस्य शामिल होते हैं। जिसमें राज्यसभा में पांच और लोकसभा में एक सीट खाली है। जिससे निर्वाचक मंडल की प्रभावी संख्या 782 है। अब वहीं जीतने वाले उम्मीदवार को 391 मतों की जरुरत होगी बशर्ते सभी अपने मताधिकार का प्रयोग करें।
गौरतलब है कि, लोकसभा की 543 सीट में से एक सीट, पश्चिम बंगाल में बशीरहाट खाली है, जबकि 245 सदस्यीय राज्यसभा में पांच सीट खाली हैं। राज्यसभा में पांच खाली सीट में से चार जम्मू-कश्मीर से और एक पंजाब से है। लोकसभा में, बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन राजग को 542 सदस्यों में से 293 का समर्थन मिला है। इसमें सत्तारूढ़ गठबंधन को राज्यसभा प्रभावी सदस्य संख्या 240 में 129 सदस्यों का समर्थन मिला है। अब इसमें शर्त यही है कि, मनोनीत सदस्य राजग उम्मीदवार के समर्थन में मतदान करें। सत्तारूढ़ गठबंधन को कुल 422 सदस्यों का समर्थन मिला हुआ है।





