नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जम्मू-कश्मीर का मूल दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया है। उपराज्यपाल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। राज्य का दर्जा बहाल करना एक महत्वपूर्ण सुधार प्रक्रिया की शुरुआत मानी जा रही है। इससे जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक अधिकार फिर से मिलेंगे और उनकी पहचान की सुरक्षा होगी।
केंद्र सरकार के पास जाएगा प्रस्ताव
अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास जाएगा। मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के अन्य मंत्रियों से इस मुद्दे पर बातचीत करने का अधिकार दिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर की विशिष्ट पहचान और लोगों के अधिकारों की सुरक्षा नई सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री जल्द ही नई दिल्ली में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।
4 नवंबर को होगा श्रीनगर में विधानसभा का विशेष सत्र
इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने चार नवंबर को श्रीनगर में विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। उपराज्यपाल से इस सत्र को बुलाने और संबोधित करने का अनुरोध किया गया है। पहले सत्र के लिए उपराज्यपाल के अभिभाषण का मसौदा भी मंत्रिमंडल के सामने रखा गया मंत्रिमंडल ने इस पर विचार करने का निर्णय लिया है।
कैबिनट से हो गया था प्रस्ताव पास
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट ने राज्य के दर्जे की बहाली के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है। यह निर्णय गुरुवार को हुई एक कैबिनेट मीटिंग में लिया गया जिसमें उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र चौधरी और अन्य मंत्री भी मौजूद थे। उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा चुनाव के दौरान कहा था कि उनकी मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी।
राजनीतिक दलों ने उमर सरकार की आलोचना
पीडीपी और अवामी इत्तेहाद पार्टी ने उमर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में सिर्फ राज्य का दर्जा देने का जिक्र है, लेकिन अनुच्छेद 370 का कोई उल्लेख नहीं है। यह कदम आत्मसमर्पण जैसा है और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वादों के खिलाफ है।





