नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने के लिए सीएम उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट ने प्रस्ताव पास कर दिया है। यह फैसला उमर अब्दुल्ला के शपथ ग्रहण के एक दिन बाद यानी गुरुवार, 17 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में लिया गया। श्रीनगर सचिवालय में कैबिनेट की पहली बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार उमर अब्दुल्ला 2 दिनों में दिल्ली जाएंगे और वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। इस मुलाकात में वे प्रस्ताव का ड्राफ्ट सौंपेंगे।
कैबिनेट में शामिल सदस्य
श्रीनगर की इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों और कैबिनेट सदस्य शामिल थे। बैठक में कोषाध्यक्ष शम्मी ओबेरॉय, राजनीतिक सलाहकार नासिर असलम वानी और वरिष्ठ NC नेता रतन लाल गुप्ता शामिल थे। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और उमर अब्दुल्ला के आवास पर उनसे मुलाकात की।
पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर 2 UT बनाए गए
आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया था। इसके साथ ही प्रदेश का पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म करते हुए उसे दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।
कैबिनेट से मंजूरी के बाद का प्रोसेस
1. पूर्ण राज्य का दर्जा को कैबिनेट से मंजूरी के मिलने के बाद उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इसके आगे का निर्णय केंद्र सरकार के हाथ में है। पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव की प्रक्रिया कर सकती है।
2. पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए संसद में एक कानून पारित करना होगा। यह बदलाव संविधान की धारा 3 और 4 के तहत होंगे। इसके पीछे का कारण है कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठन किया गया था।
3. इन सबके अलावा लोकसभा और राज्यसभा में नए कानूनी बदलावों का मंजूरी जरूरी होगा। यानी संसद से प्रस्ताव का पास होना जरूरी है।
4. संसद से प्रस्ताव पास होने के बाद राष्ट्रपति से मंजूरी की जरुरी है जिसके बाद राष्ट्रपति कानूनी बदलाव की अधिसूचना चारी करेंगे। इसी दिन से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।
पूर्ण राज्य के दर्ज के बाद क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं?
1. राज्य को विधानसभा को सार्वजनिक व्यवस्था और समवर्ती सूची के मामलों में कानून बनाने के अधिकार मिल सकते हैं।
2. सरकार जब वित्तीय बिल पेश करेंगी तो उपराज्यपाल की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं होगी।
3. अखिल भारतीय सेवाओं पर राज्य सरकार का पूरा नियंत्रण हो जाएगा। यानी राज्य में अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग राज्य की सरकार के दाथ में होगा जिसके लिए राज्य सरकार को उपराज्यपाल से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
4. अनुच्छेद 286, 287, 288 और 304 में बदलाव से व्यापार, टैक्स और वाणिज्य के मामलों में राज्य सरकार को सभी अधिकार मिल जाएंगे।
5. केंद्र शासित प्रदेश में विधायकों की संख्या का 10% हिस्सा मंत्री बनाया जा सकता है। अगर इसे राज्य का दर्जा मिल जाता है तो यह नियम खत्म हो जाएगा और विधायकों की संख्या का 15% हिस्सा मंत्री बन सकता है।
6. जेल के कैदियों की रिहाई और पक्ष पार्टी के बाकी चुनावी वादे पूरे करने वाली योजनाओं को पूरा करने में राज्य सरकार को केंद्र से ज्यादा अधिकार हासिल होंगे।





