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Thursday, April 2, 2026
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यूक्रेन संकट पर लोक सभा में बहस के दौरान सरकार का दावा – दुनिया का सबसे बेहतर, प्रभावी और कुशल बचाव अभियान चलाया

लोक सभा में नियम 193 के तहत यूक्रेन पर चर्चा के दौरान ऑपेरशन गंगा में शामिल होने वाले केंद्रीय मंत्रियों ने बोलते हुए बचाव अभियान की बारीकियां समझाई और राजनीतिक बयानबाजी करने को लेकर विरोधी दलों पर निशाना भी साधा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर पोलैंड के पड़ोसी देशों में जाकर ऑपरेशन गंगा अभियान में शामिल होने वाले केंद्रीय मंत्रियों – हरदीप सिंह पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया , किरेन रिजिजू और जनरल ( सेवानिवृत्त ) वीके सिंह ने चर्चा के दौरान हस्तक्षेप करते हुए बचाव अभियान के बारे में विस्तार से लोकसभा में बताया। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने राजनीति करने के लिए विरोधी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि यूक्रेन में लड़ाई चल रही थी। हमारे अधिकारी वहां एक-एक विद्यार्थी को बचाने के अभियान में लगे थे और यहां पर कुछ दल इस पर राजनीति कर रहे थे, सरकार की आलोचना करने में लगे हुए थे। उन्होंने लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और शशि थरूर द्वारा दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह के मुद्दे को उठाने की कोई जरूरत नहीं थी। लगभग 23 हजार भारतीयों को वहां से निकाला गया। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ भी करें विरोधी दल सिर्फ आलोचना ही करते नजर आते हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देरी के विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने जनवरी की शुरूआत में हीं तैयारी शुरू कर दी थी। उस समय चार हजार लोग भारत वापस आ गए थे। बाकी लोग कॉलेज की पढ़ाई और अटेंडेंस को लेकर वहां रुके रहे। उन्होंने ऑपेरशन गंगा अभियान की तारीफ करते हुए इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का जवाब देते हुए कहा कि हमने श्रेय के लिए कोई काम नहीं किया। हम 2014 से कई बार इस तरह के अभियान को चला चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विदेश में फंसे भारतीयों को सकुशल वापस लाकर केवल यह संदेश देना चाहती है कि दुनिया में जहां कहीं भी भारतीय संकट में फंसेंगे, उनकी मदद करने के लिए भारत सरकार है। उन्होंने 1990 में कुवैत में चलाए गए बचाव अभियान को लेकर कहा कि उसे जिस तरह से चलाया गया था वह अपने आप में शर्मनाक था। उन्होंने कहा कि सरकार ने यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों के लिए हर संभव प्रयास किए। कुछ विद्यार्थियों के साथ उन देशों में हुए दुर्व्यवहार के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कई जगह पर विद्यार्थियों द्वारा बुजुर्ग लोगों को धक्का देकर आगे बढ़ने की कोशिश को रोकने के लिए वहां के स्थानीय प्रशासन को ऐसा करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन संकट के दौर में वहां फंसे भारतीयों को बचाने के लिए जो मोदी सरकार ने किया वो दुनिया की किसी सरकार ने नहीं किया। उन्होंने हरजोत सिंह को लाने के अभियान का भी जिक्र सदन में किया। एडवाइजरी जारी करने में देरी को लेकर विरोधी दलों द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल था, जिसने 15 फरवरी को सबसे पहले एडवाइजरी जारी की थी। इसके बाद भी सरकार ने 18, 20 और 21 फरवरी को यूक्रेन में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की थी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने जब हमें यूक्रेन के पड़ोसी देशों में जाने को कहा तो साथ ही यह निर्देश भी दिया था कि हम भारतीयों को वापस लाने वाली आखिरी फ्लाइट में ही आएं। इससे पहले, चर्चा में शामिल होते हुए कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी और मनीष तिवारी ने कहा कि विदेशों में फंसे भारतीयों को सकुशल वापस लाने के लिए पिछली सरकारों ने भी कई मौकों पर अभियान चलाया लेकिन इस बार सरकार और उसके मंत्रियों द्वारा श्रेय लेने और सरकार के पक्ष में नारे लगवाने की कोशिशों की वजह से बचाव ऑपेरशन से उत्पन्न सद्भावना कम हुई है। शशि थरूर ने सरकार द्वारा चलाए गए अभियान की तारीफ करते हुए यूक्रेन के पड़ोसी देशों में प्रचार-प्रसार करने की कोशिशों की आलोचना भी की। उन्होंने रूस को लेकर मोदी सरकार की नीति पर भी सवाल उठाए। तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय ने सरकार पर अपनी ही तारीफ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने इस विवाद में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने रूस की भूमिका की आलोचना करते हुए सरकार से उस पर अपनी निर्भरता को कम करने का आग्रह किया। नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने भारत सरकार से इस लड़ाई को रुकवाने के लिए कोशिश करने की मांग की। डीएमके सांसद थामीजाची थंगापाडियन ने सरकार से आग्रह किया कि भारत को रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित किए गए नीट विधेयक का भी जिक्र करते हुए सरकार से यूक्रेन से वापस लौटे छात्रों के भविष्य को लेकर भी कदम उठाने का आग्रह किया। –आईएएनएस एसटीपी/एएनएम

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