नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की ज्वेलरी शॉप में हुई लूट के प्रयास और उसमे शामिल मंगेश यादव की मुठभेड़ के दौरान हुई मौत को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। उत्तर प्रदेश सरकार पर विपक्ष इसको लेकर हमलावर है, विपक्ष का कहना है कि यह एनकाउंटर मंगेश यादव की जाति को देखकर किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश पुलिस इस एनकाउंटर को कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रही है।
उसके खिलाफ पुलिस के पास सारे सबूत मौजूद हैं
इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी प्रशांत कुमार ने बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि मंगेश यादव सुल्तानपुर की ज्वेलरी शॉप में हुई लूट केस में शामिल था, उसके खिलाफ पुलिस के पास सारे सबूत मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी प्रशांत कुमार ने अपने बयान में कहा है कि पुलिस कभी-भी जाति के आधार पर अपनी कार्रवाई नहीं करती है।
अपराधियों द्वारा दो बार रेकी भी की गई थी
मंगेश यादव के एनकाउंटर को लेकर उठे विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने एक प्रेस कांफ्रेंस की और इस मुद्दे पर खुलकर बात की है। इसको लेकर दोनों बड़े पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि पुलिस के पास मंगेश यादव के खिलाफ सारे प्रयाप्त सबूत हैं। उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि सुल्तानपुर की ज्वेलरी शॉप में लूट के लिए अपराधियों द्वारा दो बार रेकी भी की गई थी।
आरोपी सुल्तानपुर की ज्वेलरी शॉप में बोलेरो से पहुंचे थे
दोनों बड़े पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से कहा है कि सभी आरोपी सुल्तानपुर की ज्वेलरी शॉप में बोलेरो से पहुंचे थे। एडीजी अमिताभ यश ने जानकारी दी कि ज्वेलरी शॉप के अंदर फुरकान, अनुज, मंगेश यादव, अरबाज और अंकित यादव घुसे थे, इन्ही लोगों ने ही घटना को अंजाम दिया था। वहीं अन्य आरोपी विनय शुक्ला, विपिन सिंह, दुर्गेश, अरविंद और विवेक ज्वेलरी शॉप के बाहर घेराबंदी किए हुए थे, ताकि किसी तरह की समस्या उत्पन्न होने पर ये फायर कर सके और अपने साथियों को पुलिस से बचा सके।
अधिकारियों ने सबूत के रूप में वीडियो भी दिखाएं
पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी है कि ये सभी आरोपी पुलिस पर फायर करने को भी तैयार थे। जिससे ये सभी आवश्यकता पड़ने पर वहां से तुरंत भाग सके। यह सभी चीज CCTV फुटेज और टेक्नीकल विश्लेषण में किया गया है। जिन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनसे पूछताछ में यह सब क्लियर हुआ है। इस मामले में पुलिस और STF ने मिलकर काम किया है। अधिकारियों ने सबूत के रूप में वीडियो भी दिखाएं।





