राष्ट्र में अन्याय, शोषण, भ्रष्टाचार, अनाचार और राजनीतिक अराजकता के विरुद्ध समय-समय पर क्रांतियां होती रही हैं। लेकिन उनका साधन और उद्देश्य शुद्ध न रहने से उनका दीर्घकालिक परिणाम संदिग्ध रहा है। यही कारण है कि लोकतंत्र को जीवंतता देने की बात हो या भ्रष्टाचार मुक्ति का आह्वान, असरकारक नहीं क्लिक »-www.prabhasakshi.com




